किसान नेताओं ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के किसानों को लिखे गए पत्र पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। किसानों ने सवाल किया कि क्या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भगवान हो गई है, जिससे कभी कोई गलती नहीं हो सकती?
सरकारों का विरोध लोकतंत्र की आत्मा होता है, लेकिन पिछले छह साल में हुए सभी आंदोलनों के लिए विपक्ष और तथाकथित देश विरोधी ताकतों को जिम्मेदार ठहराना यही साबित करता है कि बीजेपी यह मानकर चल रही है कि उससे कभी कोई गलती नहीं हो सकती। किसान नेताओं ने कहा कि कृषि मंत्री ने यह भी संकेत दे दिया है कि आगे जो भी आंदोलन होंगे, वे देश विरोधी ताकतों के ही होंगे और जो भी सरकार के खिलाफ बोलेगा उसे देशद्रोही समझा जाएगा। किसान नेताओं ने सरकार से इस तरह के दृष्टिकोण से बचने की सलाह दी है।
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को किसानों के नाम एक पत्र लिखकर कृषि कानूनों को किसानों के हित में बताया। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों का विरोध राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है।
ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के सचिव अविक शाहा ने अमर उजाला से कहा कृषि मंत्री और भाजपा ने यह मान लिया है कि वे भगवान हो गए हैं, इसलिए उनसे कोई गलती नहीं हो सकती। लिहाजा वे जमीन पर रहने वाले किसानों का कष्ट नहीं समझ पा रहे हैं। शायद यही कारण है कि वे इस समस्या का कोई समाधान भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
कृषि मंत्री ने अपने पत्र में ऐसी ताकतों की बात कही है, जो 1962 में यद्ध के दौरान देश को कमजोर करने का काम कर रही थीं। उन्होंने यहां तक कहा है कि कुछ लोग देश में उस समय संकट पैदा करना चाहते हैं, जब देश का सीमा विवाद चल रहा है और कुछ लोग जवानों को ले जा रही सामग्री वाली ट्रेनों को भी रोकने की कोशिश की है।
किसान नेताओं ने पूछा, चुनाव आयोग में शिकायत करें
अविक शाहा ने कहा कि अगर सरकार को लगता है कि देश में ऐसी ताकतें हैं और वे चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड पार्टी भी हैं, तो उसे इसके विरोध में चुनाव आयोग में शिकायत करनी चाहिए।
कृषि मंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा है कि कुछ लोग पहले बांधों को बनाने में रोड़ा अटकाकर किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंचने देना चाहते थे। वही लोग अब इस कानून का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी शासन में पिछले छः साल में हुए विरोध के पीछे ऐसी ही ताकतें हैं, जो कभी छात्रों के पीछे तो कभी समाज के दूसरे वर्गों के पीछे छिपकर अपने मंसूबे कामयाब करना चाहती हैं।
कृषि मंत्री का ये पत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी बनाकर किसान आंदोलन का हल निकालने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है कि अगर इसका जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन पूरे राष्ट्र में फैल सकता है।