पूरे देश के लिए सात सितंबर का दिन ऐतिहासिक रहने वाला है। इस दिन चंद्रयान-2 चांद की सतह पर उतरेगा। इसरो का मूड भी इस वक्त कुछ ऐसा ही है, कि इस मिशन की सफलता है कि लिए प्रार्थना की जाए। शनिवार के शुरुआती घंटों में नियोजित चंद्रमा की सतह पर "विक्रम" मॉड्यूल की सॉफ्ट लैंडिंग का हर कोई इंतजार कर रहा है।
इस मिशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि "इसपर कोई ज्यादा बोलना नहीं चाहता। इवेंट खत्म होने दें। हर किसी का दिमाग केवल उस पर है जो (चंद्रयान -2) अंतरिक्ष यान और लैंडर ('विक्रम') में हो रहा है। चलो सभी सफल सॉफ्ट-लैंडिंग के लिए प्रार्थना करते हैं।"
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के सिवान ने हाल ही में कहा था कि अंतरिक्ष एजेंसी ने मिशन की सफलता के लिए "मानवीय रूप से हर संभव प्रयास किया है"। शीर्ष अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने भी सफलता को लेकर विश्वास व्यक्त किया है।
एक दशक से अधिक समय तक चंद्रयान -1 मिशन का नेतृत्व करने वाले इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नैयर का कहना है, "यह एक उल्लेखनीय घटना (सॉफ्ट-लैंडिंग) होने जा रही है और हम सभी इसके लिए तत्पर हैं। मुझे यकीन है कि यह 100 फीसदी सफल होगा।" इसरो के एक अन्य पूर्व अध्यक्ष ए एस किरण कुमार ने प्रस्तावित सॉफ्ट-लैंडिंग को बहुत ही महत्वपूर्ण संचालन में से एक बताया है।
किरण कुमार ने कहा, "अब तक जो कुछ भी किया गया है उसकी तुलना में अब हम सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहे हैं, अब तक सभी चीजें योजना के अनुसार हुई हैं और उम्मीद है कि हर चीज योजना के अनुसार ही चलेगी।"
चंद्रयान -1 के परियोजना निदेशक और मंगलयान मार्स ऑर्बिटर मिशन के कार्यक्रम निदेशक एनादुराई ने कहा है कि इसरो को 40 से अधिक जीईओ (जियोसिंक्रोनस इक्वेटोरियल ऑर्बिट) मिशन का अनुभव है। मुझे यकीन है कि इसकी सॉफ्ट लैंडिंग होगी। उन्होंने कहा कि इसरो ने लॉन्च से पहले कई टेस्ट किए थे और वह उनमें से कुछ में समीक्षा टीम का हिस्सा थे।