पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने शुक्रवार को गोवा में एससीओ-विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि शांति की संभावनाओं का अंदाजा तब लगाया जा सकता है जब महान शक्तियां शांतिदूतों की भूमिका निभाएं। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में अपने मुख्य संबोधन में जरदारी ने सामूहिक रूप से आतंकवाद के खतरे को खत्म करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'हमें कूटनीतिक बिंदुओं पर बढ़त हासिल करने करने के लिए आतंकवाद को हथियार बनाने में नहीं फंसना चाहिए।
जरदारी का यह बयान भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के एससीओ बैठक के दौरान उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने सीमा पार आतंकवाद की चर्चा करते हुए कहा कि था कि यह 'बेरोकटोक' जारी है। उन्होंने कहा था कि सीमा पार आतंकवाद सहित आतंक के रूपों और अभिव्यक्तियों पर लगाम लगनी चाहिए।
पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद के मुद्दों के संबंध में भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध कई वर्षों से अनिश्चित रहे हैं। इस्लामाबाद किसी भी वार्ता के पूर्व पूर्व भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के लिए अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग कर रहा है।
उन्होंने सामूहिक कार्रवाई का भी आग्रह किया और कहा कि हमारे लोगों की सामूहिक सुरक्षा हमारी संयुक्त जिम्मेदारी है। जरदारी ने एससीओ के प्रति पाकिस्तान की मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भारत पहुंचने पर कहा, 'एससीओ को पाकिस्तान जितना महत्व देता है, उसके लिए इससे ज्यादा शक्तिशाली संकेत नहीं हो सकता कि इस सीएफएम के लिए मैं गोवा में मौजूद हूं।
2026 में जब पाकिस्तान एससीओ का अध्यक्ष होगा मेरा मानना है कि एक राजनयिक पारस्परिक व्यवस्था के आधार पर भारत एससीओ में भाग लेने का फैसला करेगा। हमारा दिल से मानना है कि हर पाकिस्तानी और सभी भारतीय शांति से रहना चाहते हैं और शांति हमारी नियति है। हम इतिहास के बंधक नहीं बनेंगे। पाकिस्तानी मीडिया ने अपने विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के हवाले से कहा, 'हम अपना इतिहास बनाएंगे।'