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मुंबई में डांस बार फिर गुलजार होने का रास्ता साफ, रोक वाला कानून सुप्रीम कोर्ट में खारिज

Fri, 18 Jan 2019 05:26 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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मुंबई में डेढ़ दशक पहले तक चलने वाले डांस बारों के एक बार फिर गुलजार होने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र में डांस बार चलाने के लिए लाइसेंस हासिल करने पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून के कई प्रावधानों को खारिज कर दिया। हालांकि कानून को बरकरार रखा गया है।

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जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने महाराष्ट्र अश्लील नृत्य (होटल, रेस्टोरेंट या बार में) निरोधी और महिला (कामकाजी) सम्मान रक्षक कानून- 2016 के कुछ प्रावधानों को हटाने का निर्देश दिया, जिनमें बार रूम में अनिवार्य तौर पर सीसीटीवी कैमरे लगाना और रूम व डांस फ्लोर के बीच एक अस्थायी दीवार बनाने जैसे कई आदेश शामिल हैं। इस कानून को प्रवेश द्वार पर सीसीटीवी कैमरे लगाने को सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह अनुचित बताते हुए इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया। 

शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि  सामाजिक मापदंड पर अनैतिक नहीं माने जाने वाले प्रचलन को राज्य जबरन अनैतिक करार नहीं दे सकता। अपने 100 पन्नों के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने डांस बार के कलाकारों पर पैसे न उड़ाने की शर्त को तो सही माना है, लेकिन कलाकारों को टिप देने से रोकने वाले प्रावधान को निरस्त कर दिया।
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इसकेअलावा कोर्ट ने उस शर्त को भी खत्म कर दिया, जिसमें डांस बार को स्कूल व धार्मिक स्थलों से कम से कम एक किलोमीटर दूर बनाए जाने का प्रावधान था। कोर्ट ने कहा कि ऐसे प्रावधान का पालन मुंबई जैसे शहर में असंभव बात है। पीठ ने डांस बार और कलाकारों के बीच लिखित कांट्रेक्ट किए जाने की शर्त को सही ठहराया है। साथ ही डांस बार की टाइमिंग शाम 6 बजे से 11.30 बजे तक तय किए जाने के लिए भी कहा कि यह शर्त अतार्किक नहीं है। 

डांस बार चलाने वाले की अच्छी छवि जरूरी नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की तरफ से रखी गई उस शर्त को भी खारिज कर दिया, जिसमें डांस बार का लाइसेंस हासिल करने के लिए साफ छवि और स्वच्छ पृष्ठभूमि का होना आवश्यक बताया गया था। पीठ ने कहा कि कानून में इस तरह की शर्त की कोई व्याख्या नहीं गई है। 

 

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भारतीय बार गर्ल्स संघ ने बताई बड़ी जीत

भारतीय बार गर्ल्स संघ की अध्यक्ष वर्षा काले ने हाईकोर्ट के फैसले को बड़ी जीत करार दिया है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि राज्य के अधिकारी डांस बार को लाइसेंस जारी करना शुरू कर देंगे ताकि हजारों बार डांसर वापस लौट सकें और अपनी जिंदगी शुरू कर सकें।

काले ने कहा कि डांस बार में उस समय 75 हजार से अधिक महिलाएं रोजगार पाती थीं, जब राज्य सरकार ने 2005 में कथित तौर पर अश्लीलता को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए उन्हें बंद करने का निर्णय किया था।

उन्होंने दावा किया कि 40 हजार महिलाओं ने जहां यह पेशा छोड़ दिया और जीविका के लिए दूसरे काम करने लगीं वहीं करीब 35 हजार महिलाएं अब भी विभिन्न होटलों में वेटर और गायिका का काम करती हैं।

डांस बार मालिक संगठन के पूर्व अध्यक्ष और डांस बार फिर से खोलने के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले मनजीत सिंह सेठी ने भी निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे हजारों बार डांसर को गरिमामय तरीके से जीने में सहयोग मिलेगा।

 

कानूनी बिरादरी में दो फांड़

डांस बार को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले पर वकीलों के एक धड़े ने जहां इसकी प्रशंसा की वहीं एक अन्य वर्ग ने इसे राज्य सरकार के लिए झटका बताया। बंबई हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एफ आई रिबेलो ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने डांस बार पर अनुचित प्रतिबंधों को खत्म कर ठीक काम किया है।

डांस बार संगठन की तरफ से मामले में प्रतिनिधित्व कर चुके वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने फैसले का स्वागत किया। वरिष्ठ वकील और महाराष्ट्र के पूर्व महाधिवक्ता श्रीहरि अने ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को व्यवहारिक और संतुलित बताया। वकील उदय वारुंजीकर का मानना है कि उच्चतम न्यायालय को 2016 के कानून के सभी प्रावधानों को बरकरार रखना चाहिए था।

विपक्ष ने कहा- सत्ता में आएं, तो फिर बंद कराएंगे

गृह मंत्री रंजीत पाटिल ने कहा कि उच्चतम न्यायालय डांस बार पर राज्य के कई प्रावधानों पर सहमत हुआ है, जिसमें समय की पाबंदी और बालाओं पर पैसे नहीं लुटाना जैसे प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हम अदालत के फैसले का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और उसका सम्मान करते हैं। हम निगरानी बनाए रखेंगे ताकि डांस बार की आड़ में अवैध गतिविधियां नहीं चल सकें।

वहीं, विपक्षी दल राकांपा ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और डांस बार मालिकों की मिलीभगत के कारण राज्य में डांस बार फिर से खोलने का रास्ता साफ हुआ है। साथ ही पार्टी ने कहा कि जब वह राज्य में सत्ता में आएगी तो इन पर फिर से प्रतिबंध लगवाएगी।

राकांपा ने आरोप लगाए कि मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस और बार मालिकों के संगठन की बैठक मुख्यमंत्री के सरकारी आवास में हुई थी, जिस कारण इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सरकार की स्थिति कमजोर पड़ गई।

शिवसेना के वरिष्ठ नेता अनिल परब ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उच्चतम न्यायालय बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार नहीं रख पाया क्योंकि 2016 के कानून का उद्देश्य सही था। वहीं, विधान परिषद् में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने राज्य सरकार से कहा कि तुरंत कानूनी कदम उठाएं ताकि राज्य में फिर से डांस बार नहीं खुल पाएं।

 
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