लाल किले पर किसानों ने कुछ ऐसे किया प्रदर्शन
- फोटो : पीटीआई
देश के प्रमुख वामपंथी दलों ने मंगलवार को प्रदर्शनकारी किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा की निंदा की और आरोप लगाया कि सरकार ने समय रहते हालात नहीं संभाले तथा स्थिति बिगड़ने दी। गौरतलब है कि किसान समूहों की ट्रैक्टर परेड के दौरान कई स्थानों पर पुलिस के साथ झड़प हुई। इसके बाद पुलिस ने किसान समूहों पर आंसू गैस के गोले छोड़े तथा लाठीचार्ज किया।
दिल्ली की सीमा पर कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़ दिए। ट्रैक्टर परेड के लिए जो मार्ग निर्धारित किया गया था उन्होंने उसका अनुसरण नहीं किया। ट्रैक्टर परेड के लिए निर्धारित मार्ग से हटकर प्रदर्शनकारी किसानों का एक समूह मंगलवार को लाल किले में घुस गया और राष्ट्रीय राजधानी स्थित इस ऐतिहासिक स्मारक के कुछ गुंबदों पर अपने संगठनों के झंडे लगा दिए।
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया, ‘‘मोदी सरकार द्वारा हालात को यहां तक पहुंचाया गया। किसान 60 दिनों से सर्दीं के बीच शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें दिल्ली में नहीं आने दिया गया। 100 से अधिक किसानों की मौत हो गई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हिंसा किसी चीज का जवाब नहीं है और यह अस्वीकार्य है। लेकिन भाजपा की ट्रोल आर्मी अपने अधिकार मांगने वालों को बदनाम करती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के मंत्री निराधार आरोप लगाते हैं, किसानों की वाजिब मांगों के निदान का यह कोई तरीका नहीं है। उधर, भाकपा महासचिव डी राजा ने दावा किया कि हिंसा कोई रास्ता नहीं है, लेकिन सरकार ने स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाने दिया। सरकार को किसानों को विश्वास दिलाना चाहिए था कि संसद के आगामी सत्र में वह तीनों कानूनों को वापस लेने के लिए विधेयक लाएगी।