ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के हमले के खिलाफ वाम दलों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की निंदा की और केंद्र सरकार पर इस मुद्दे पर चुप रहने का आरोप लगाया। वाम नेताओं ने कहा कि भारत की विदेश नीति को राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों पर चलना चाहिए, न कि किसी वैश्विक दबाव में।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग तख्तियां लेकर पहुंचे और हमलों के खिलाफ नारे लगाए। नेताओं ने कहा कि जब बातचीत चल रही थी, तब हमला करना गलत है। उन्होंने मांग की कि भारत सरकार युद्ध रोकने के लिए पहल करे और शांति बहाल करने में भूमिका निभाए।
ब्रिंदा करात का सीधा हमला
सीपीआई(एम) नेता ब्रिंदा करात ने कहा कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने ईरान पर हमला किया और सरकार इस पर चुप है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की आवाज संप्रभुता और शांति के पक्ष में होनी चाहिए। उन्होंने इस्राइल की कार्रवाई को आक्रामक बताया और कहा कि भारत को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
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डिपांकर भट्टाचार्य की चेतावनी
सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के महासचिव डिपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि यह युद्ध क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के लाखों नागरिक पश्चिम एशिया में काम करते हैं, इसलिए यह संकट भारत को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने मांग की कि भारत सरकार युद्ध रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास करे।
सरकार की विदेश नीति पर सवाल
वाम नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की विदेश नीति अमेरिका के दबाव में झुकी हुई दिख रही है। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी सैन्य गठजोड़ से दूरी बनाकर शांति और संवाद का समर्थन करना चाहिए।
कई वाम दल हुए शामिल
प्रदर्शन में सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीआई(एमएल) लिबरेशन, आरएसपी और एआईएफबी जैसे दल शामिल हुए। आयोजकों ने कहा कि यह विरोध सैन्य कार्रवाई के खिलाफ और राष्ट्रीय संप्रभुता के समर्थन में है। अमेरिका और इस्राइल ने शनिवार को ईरान पर बड़ा हमला किया था। इसके बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। वाम दलों का कहना है कि भारत को युद्ध से दूर रहकर शांति की पहल करनी चाहिए।
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