कांग्रेस नीत यूडीएफ ने बुधवार को विधानसभा में वामपंथी सरकार (एलडीएफ) के उस प्रस्ताव का विरोध किया, उसने राज्य के बजट सत्र के शुरुआत में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को उनके नीतिगत संबोधन के लिए धन्यवाद देने के लिए पेश किया। यूडीएफ ने यह कहते हुए विरोध किया कि यह प्रस्ताव एलडीएफ के नरेंद्र मोदी और भाजपा के समर्थक रुख का संकेत देते है। वहीं, एलडीएफ ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि केरल में वाम मोर्चा और उसके नेता-मुख्यमंत्री पिनरई विजयन भाजपा और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के सख्त विरोधी हैं।
राज्यपाल के 23 जनवरी के नीतिगत अभिभाषण को लेकर वाम मोर्चा पर हमला बोलते हुए यूडीएफ के कई विधायकों ने दलील दी कि इसमें केंद्र सरकार या उसकी नीतियों की कोई आलोचना नहीं है, जबकि राज्य सरकार समय-समय पर केरल की वित्तीय समस्याओं के लिए केंद्र को दोषी ठहराती रही है।
कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझलनादन ने वाम मोर्चे पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उसमें खान द्वारा पढ़े गए नीति दस्तावेज में मोदी सरकार या भाजपा की कड़ी निंदा करने की 'हिम्मत या राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी' है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीति दस्तावेज में एक भी पंक्ति ऐसी नहीं है जिसमें केंद्र की नीतियों की आलोचना की गई हो।उन्होंने कहा, आप भाजपा और नरेंद्र मोदी का विरोध करने के अपने प्रयासों को लेकर गंभीर नहीं हैं।
कुझलनादन ने कहा कि वाम सरकार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन से प्रेरित होना चाहिए, जिन्होंने सुनिश्चित किया कि राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया जाए कि नीति दस्तावेज में सब कुछ आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा है, क्योंकि राज्यपाल टीएन रवि ने इसके कुछ हिस्सों को पढ़ने से इनकार कर दिया था।
उन्होंने कहा, 'यह हिम्मत है। यह राजनीतिक इच्छाशक्ति है। केवल यह कहना कि आप किसी से नहीं डरते हैं, पर्याप्त नहीं है। आपको इसे एक्शन के माध्यम से दिखाना होगा। मुझे डर है कि आप (एलडीएफ) मोदी का विरोध नहीं करना चाहते, बल्कि उनके साथ जुड़ना चाहते हैं।
तिरुवनचूर राधाकृष्णन और एन शम्सुद्दीन जैसे यूडीएफ के अन्य विधायकों ने भी नीतिगत संबोधन के साथ-साथ राज्य में मादक पदार्थों से संबंधित घटनाओं में वृद्धि और राज्य पुलिस के कई अधिकारियों को आपराधिक मामलों में आरोपी बनाए जाने के कारण कानून और व्यवस्था की स्थिति को लेकर वाम सरकार की आलोचना की। पी पी चितरंजन सहित कई वाम विधायकों ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन किया और यह भी कहा कि एलडीएफ, भाजपा और मोदी सरकार का विरोध करता है। धन्यवाद प्रस्ताव पर दिन के सत्र के अंत में चर्चा बेनतीजा रही और इसके गुरुवार को भी जारी रहने की संभावना है।
राज्यपाल खान ने अपने संबोधन में कहा था कि विधानसभाएं लोगों की इच्छा और कानून की भावना का प्रतिनिधित्व करती हैं और विधायिका की मंशा की रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने नीति दस्तावेज से यह भी पढ़ा था कि संविधान ने संघ और राज्यों के लिए विधायी स्थान प्रदान किया है और इसलिए, राज्यों के विधायी डोमेन में घुसपैठ "सहकारी संघीय व्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है। राज्यपाल ने आगे कहा था कि राज्य की उधार लेने की क्षमता पर हालिया प्रतिबंध स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में हस्तक्षेप करने की उनकी क्षमता को बाधित कर रहे हैं।