यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे नेताओं को फिलहाल खुद के टिकट कटने का खौफ सता रहा है। वह अभी से सुरक्षित ठिकाने की तलाश में जुटे हैं। दूसरे राजनीतिक दलों के संपर्क में हैं। कांग्रेस को छोड़ सभी दलों के कुछ नेता फिलहाल विचलित है। टिकटों को लेकर सपा और बसपा में ज्यादा मारामारी है। समाजवादी पार्टी ने मौजूदा विधायकों की सीट को छोड़कर ज्यादातर स्थानों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक सपा अब घोषित प्रत्याशियों में बदलाव और सिटिंग विधायकों के टिकट काटकर नए चेहरों को मैदान पर उतारने पर विचार कर रही है। बसपा में एक साल से प्रत्याशियों का ऐलान किया जा रहा है, लेकिन लगातार बदलाव चल रहे हैं। हर माह सूबे में दो चार प्रत्याशी बदल दिए जाते हैं। बसपा और सपा के टिकट बचाने को लेकर घोषित प्रत्याशी और मौजूदा विधायक हाईकमान के यहां टिकट बटाने और अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। फिलहाल भाजपा दूसरे दलों के कद्दावर नेताओं को साथ जोड़ने की तैयारी में है।
सहारनपुर में भाजपा रैली से ठीक पहले बसपा के पूर्व सांसद और कद्दावर नेता जगदीश राणा भगवा ब्रिगेड में शामिल हो गए। पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा रालोद में चले गए। पूर्व मंत्री प्रोफेसर किरनपाल सिंह ने सपा का दामन थाम लिया। कई दूसरे नाम दल बदलने वालों में शामिल हैं। रालोद के नेता अभी तक किसी दल से गठबंधन होने के इंतजार में है। जिस दल से उसकी दोस्ती होगी, लाजमी है उसके हिस्से में आने वाली सीटों से दूसरे दल के दावेदारों का दावा खत्म हो जाएगा और टिकट कटना तय है। टिकट कटने की कशमकश के बीच सिर्फ कांग्रेस में टिकट को लेकर ज्यादा बेचैनी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक आने वाले महीनों में राजनीतिक दलों में उठापटक का बढ़ना तय है।