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जानी-मानी वकील इंदिरा जयसिंह के एनजीओ का लाइसेंस निलंबित

Thu, 02 Jun 2016 09:57 AM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
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केंद्र सरकार ने जानीमानी वकील इंदिरा जय सिंह के एनजीओ लॉयर्स कलेक्टिव का लाइसेंस छह माह के निलंबित कर दिया। सरकार ने विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) के कथित रूप से उल्लंघन के लिए बुधवार को यह कार्रवाई की।
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एनजीओ पर फंड का इस्तेमाल राजनीति से संबंधित रैलियां और धरने करने का आरोप है। इंदिरा जयसिंह यूपीए सरकार के समय अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रह चुकी हैं।

गृहमंत्रालय ने लाइसेंस निलंबित करते हुए एनजीओ से एफसीआरए के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 30 दिन के भीतर जवाब देने को कहा है। इसके बाद एनजीओ का पंजीकरण भी रद हो सकता है। वहीं, एनजीओ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। एनजीओ ने एक बयान में कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा है कि संगठन को निशाना बनाने के लिए यह कार्रवाई की गई है।

गृह मंत्रालय की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि लॉयर्स कलेक्टिव को 2006-07 से 2013-14 के बीच विदेशी धन मिला। लेकिन इसकी ओर से दाखिल किए गए सालाना रिटर्न में कई कमियां मिली हैं। पांच पेज के नोटिस में कहा गया है कि जयसिंह जुलाई 2009 से 5 मई 2014 तक अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल थीं, इस दौरान उन्हें 96.60 लाख रुपये प्राप्त हुए।
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गृह मंत्रालय ने 30 दिन के भीतर जवाब मांगा

Home Ministry - फोटो : PTI
एनजीओ ने इस साल 30 मार्च को दिए जवाब में माना है कि 81.41 लाख रुपये एनजीओ की ओर से दिए गए। इंदिरा जयसिंह एनजीओ में तब सेक्रेटरी पद भी संभाल रही थीं। गृह मंत्रालय ने कहा कि वह हैरान कि कैसे एएसजी इतने लंबे समय तक दो पदों पर एक साथ रह सकता है। इससे केवल एफसीआरए का उल्लंघन नहीं हुआ है, बल्कि कई और सवाल भी उठते हैं। 

शाह के खिलाफ आवाज उठाने के लिए निशाना बनाया जा रहा - एनजीओ
सरकार की कार्रवाई पर एनजीओ लॉयर्स कलेक्टिव ने कहा है कि यह कुछ नहीं, सिर्फ विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) का खुला उल्लंघन है। यह साफ है कि एनजीओ से जुड़े आनंद ग्रोवर और इंदिरा जयसिंह ने सरकार और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ वकील के तौर पर कई लोगों की ओर से पैरवी की है।

शोहराबुद्दीन मामले में अमित शाह के खिलाफ भी जयसिंह ने मामला लड़ा था। एनजीओ इस मामले को चुनौती देगा। यह असंवैधानिक है। विदेशी फंड का इस्तेमाल रैलियों धरनों के लिए कभी नहीं किया गया। 
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