विवादों में चल रही संजय लीला भंसाली निर्देशित फिल्म पद्मावती का मामला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में रानी पद्मावती का चरित्र हनन किया गया है।
याचिकाकर्ता ने फिल्म से आपत्तिजनक दृश्यों को हटाने की अपील की है। फिल्म देशभर में एक दिसंबर को रिलीज होने वाली है।
वकील एमएल शर्मा ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष उल्लेख करते हुए याचिका पर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया। इस पर पीठ ने कहा कि वह इस पर विचार करेंगे।
याचिका में कहा गया है कि फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है। इसमें अलाउद्दीन खिलजी को रानी पद्मावती के साथ रोमांस करते और दरबार में नाचते दिखाया गया है जबकि सच्चाई है कि पद्मावती ने खिलजी के सामने समर्पण करने की बजाए जौहर का मार्ग चुनना बेहतर समझा।
याचिका में कहा गया है कि जिस पद्मावती ने अपनी इज्जत और सम्मान के लिए जौहर को चुनना बेहतर समझा, उसी पद्मावती का फिल्म में चरित्र हनन किया जा रहा है।
संविधान के अनुच्छेद-21 में कहीं भी फिल्म या मौखिक व लिखित तौर पर किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं दी गई है। लिहाजा फिल्म से जुड़े लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।