भारत और फ्रांस ने बढ़ते आतंकवाद पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए शुक्रवार को आतंकरोधी सहयोग बढ़ाने का निर्णय किया। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवादियों को आर्थिक मदद, आश्रय देने और उन्हें सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वालों का विरोध करने को कहा है।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने फ्रांसीसी समकक्ष ज्यां-येव्स ली द्रेन के साथ व्यापक मुद्दों पर मुलाकात के बाद संयुक्त प्रेस कार्यक्रम में ये बातें कही। बैठक में दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए सुषमा ने कहा, ‘हमने बढ़ते आतंकवाद पर गंभीर चिंता व्यक्त की और निर्णय किया है कि इस बुराई के खिलाफ मिलकर लड़ना होगा। हमने सभी देशों से अपील की है कि वे उनका विरोध करें जो आतंकवादियों को धन, आश्रय और सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराते हैं।’
समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर दोनों देशों ने हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। समुद्री सहयोग पर दोनों देशों के बीच बातचीत मनीला में भारत-आसियान सम्मेलन से इतर जापान, ऑस्टेलिया और अमेरिका के साथ चतुष्कोणीय बैठक के चंद दिन बाद हुई है।
स्वराज ने कहा कि असैन्य परमाणु सहयोग दोनों देशों के संबंधों के बीच ‘महत्वपूर्ण स्तंभ’ है। दोनों देशों के बीच महाराष्ट्र स्थित 9900 मेगावाट की जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना को तेजी से लागू करने के लिए ‘ठोस उपायों’ पर चर्चा हुई। भारत और फ्रांस ने साल 2008 में असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।