मेघवाल ने कहा कि 'दस्तावेज बताते हैं कि आंबेडकर ने अधिकतर बहस में अपनी बात रखी, लेकिन अनुच्छेद 370 पर उन्होंने बोलने से मना कर दिया था क्योंकि उन्होंने इसे देश की एकता और समावेशिता के खिलाफ माना।'
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोमवार को अपने एक बयान में कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे का विरोध किया था। मेघवाल ने कहा कि आंबेडकर का मानना था कि ये कदम देश की एकता और समावेश के खिलाफ जा सकता है। डॉ. आंबेडकर ने संविधान ड्राफ्ट करने वाली समिति में अहम भूमिका निभाई थी। केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाला विधेयक जल्दबाजी में लागू किया गया और उस वक्त आंबेडकर सदन में मौजूद भी नहीं थे।
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जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे के विरोध में थे आंबेडकर
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 'छात्रों के लिए भारत का संविधान' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान किताब का विमोचन भी किया गया। इसी दौरान केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 'डॉ. आंबेडकर ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को मान्यता नहीं दी थी।' मेघवाल ने कहा कि 'संविधान सभा के सामने आने वाले सभी अनुच्छेदों पर सबसे पहले डॉ. आंबेडकर ही बोलते थे। उस दौरान आधे या पूरे एक दिन से भी ज्यादा चर्चा होती थी। आंबेडकर बहस का जवाब देते थे।'
प्रधानमंत्री मोदी भी आंबेडकर की तरह सच्चे देशभक्त
मेघवाल ने कहा कि 'दस्तावेज बताते हैं कि आंबेडकर ने अधिकतर बहस में अपनी बात रखी, लेकिन अनुच्छेद 370 पर उन्होंने बोलने से मना कर दिया था क्योंकि उन्होंने इसे देश की एकता और समावेशिता के खिलाफ माना।' उन्होंने दावा किया कि 'पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू ने अनुच्छेद 370 लागू करने पर जोर दिया था और उन्होंने संविधान ड्राफ्ट समिति के एक सदस्य को इसे पारित कराने की जिम्मेदारी सौंपी थी। आंबेडकर उस वक्त सदन में मौजूद नहीं थे क्योंकि वे अस्पताल गए हुए थे। यह (अनुच्छेद 370) जल्दबाजी में पारित हुआ था।' मेघवाल ने कहा कि 'डॉ.आंबेडर सच्चे देशभक्त थे और प्रधानमंत्री भी उनकी तरह सच्चे देशभक्त है, जिन्होंने जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किया।'
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उल्लेखनीय है कि अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करते हुए अनुच्छेद 370 तो हटा दिया गया था और जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन करते हुए राज्य को केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया था।