दुनिया भर में सोशल मीडिया हिंसा भड़काने और नफरत फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम बनते जा रहे हैं। सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने रविवार को मई महीने की रिपोर्ट पेश की है। इसमें कहा है इस साल अप्रैल के मुकाबले मई में फेसबुक पर भड़काऊ सामग्री में करीब 38 फीसदी तो इंस्टाग्राम पर 86 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।
नफरत फैलाने वाले भाषण और सोशल मीडिया पर घृणा, हिंसा को बढ़ावा देने वाली आपत्तिजनक सामग्री डालने वालों को भविष्य में कड़ी सजा भुगतनी होगी। ऐसे कृत्यों पर लगाम लगाने के लिए सरकार नफरती भाषण विरोधी कानून लाने की तैयारी कर रही है। इस कानून के जरिये हिंसा-नफरत फैलाने वाले भाषणों-सामग्री की परिभाषा तय होगी।
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फिलहाल इस कानून का मसौदा तैयार किया जा रहा है। सरकार की कोशिश इस साल संसद में विधेयक पारित करा कर इस कानून को लागू करने की है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक फिलहाल कानून का मसौदा तैयार हो रहा है। मसौदा तैयार करते समय नफरत फैलाने, हिंसा भड़काने और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़े कानूनों के तमाम पहलुओं का ध्यान रखा जा रहा है।
मसौदा तैयार करने के बाद इस पर लोगों की राय ली जाएगी। राय के दौरान अगर नये तथ्य आए तो उसे कानून के मसौदे में शामिल किया जाएगा। गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी सोशल मीडिया के जरिये नफरत फैलाने के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए सरकार से संज्ञान लेने के लिए कहा था।
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कानून क्यों जरूरी?
दुनिया भर में सोशल मीडिया हिंसा भड़काने और नफरत फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम बनते जा रहे हैं। सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने रविवार को मई महीने की रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल अप्रैल महीने के मुकाबले मई महीने में फेसबुक पर भड़काऊ सामग्री में करीब 38 फीसदी तो इंस्टाग्राम पर 86 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।