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NEET Paper Leak: पेपर लीक में लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ गिरफ्तार, डॉ. मनोज ने बेटे के लिए खरीदे थे प्रश्नपत्र

Fri, 22 May 2026 05:01 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई ने लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज शिरूरे को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे के लिए लीक प्रश्नपत्र खरीदा था। डॉ. मनोज इस मामले में पहले से गिरफ्तार शिवराज मोटेगांवकर और पीवी कुलकर्णी के संपर्क में थे। उधर, संसद की स्थायी समिति ने एनटीए से तीखे सवाल किए और पूछा कि अगर सिस्टम से पेपर लीक नहीं हुआ, तो परीक्षा रद्द क्यों करनी पड़ी। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...
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CBI - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नीट पेपर लीक मामले में एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इस मामले में जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने महाराष्ट्र के लातूर से एक बड़े डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। यह मामला मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। सीबीआई ने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज शिरूरे को इस आरोप में पकड़ा है कि उन्होंने अपने बेटे के लिए नीट की परीक्षा का लीक हुआ प्रश्नपत्र खरीदा था।
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सीबीआई की टीम ने बुधवार को लातूर के सिद्धिविनायक बाल रुग्णालय (अस्पताल) में छापा मारा। वहां उन्होंने डॉ. मनोज शिरूरे से करीब चार घंटे तक कड़ी पूछताछ की। इसके बाद सीबीआई की टीम उन्हें पुणे ले गई और देर रात तक फिर से पूछताछ करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया। डॉक्टर पर गंभीर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लालच में यह गलत काम किया और पैसे देकर लीक हुआ पेपर खरीदा था।

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पेपर लीक कराने वाले मुख्य आरोपी कौन हैं?
सीबीआई की अब तक की जांच में कई बड़े नाम सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि डॉ. शिरूरे सीधे तौर पर रसायन विज्ञान के सेवानिवृत्त प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और आरसीसी क्लासेज के संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर के संपर्क में थे। ये दोनों ही आरोपी पेपर लीक के इस बड़े कांड में पहले ही सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इन लोगों ने ही डॉ. मनोज को वह लीक प्रश्नपत्र बेचा था जिससे उनके बेटे को परीक्षा में गलत तरीके से फायदा मिल सके।

परीक्षा का पेपर आखिर कैसे चोरी हुआ?
सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे पेपर लीक की साजिश बहुत ही शातिराना और सुनियोजित तरीके से रची गई थी। आरोप है कि मोटेगांवकर ने अपने कुछ साथियों की मदद से प्रश्नपत्र तक अपनी पहुंच बनाई थी। कोचिंग से जुड़े कुलकर्णी और प्रोफेसर मनीषा मांढरे ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के पेपर तैयार करने वाले पैनल में सेंध लगाई थी। सीबीआई के अनुसार, जब पेपर तैयार हो रहा था, तब इन दोनों ने अहम सवालों को अच्छे से याद कर लिया। बाद में बाहर आकर उन सवालों को एक कागज पर हाथ से लिखा और मोटेगांवकर तक सुरक्षित रूप से पहुंचा दिया।

चोरी किए गए सवालों को कैसे बेचा गया?
मोटेगांवकर ने अपने मोबाइल और तकनीक का गलत इस्तेमाल किया। जब उसे हाथ से लिखे हुए सवाल मिले, तो उसने तुरंत उन्हें डिजिटल रूप दे दिया। उसने अपने फोन में इन सभी सवालों की एक पीडीएफ (PDF) फाइल बना ली। इस पीडीएफ फाइल को उसने सुरक्षित रखा और फिर मोटी रकम लेकर डॉ. मनोज जैसे कई लोगों को यह प्रश्नपत्र बेच दिया। इसी तरह से पैसे के दम पर यह पूरा गोरखधंधा चला और अपनी मेहनत से पढ़ाई करने वाले योग्य छात्रों का हक मारा गया।
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इस बीच, नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली में भी हंगामा मचा हुआ है। संसद की स्थायी समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अधिकारियों से बहुत तीखे सवाल किए हैं। शिक्षा सचिव विनीत जोशी और एनटीए के डीजी अभिषेक सिंह समिति के सामने पेश हुए। जब समिति ने पूछा कि पेपर कैसे लीक हुआ, तो डीजी अभिषेक सिंह ने दावा किया कि उनके सिस्टम से कोई पेपर लीक नहीं हुआ था। 

 
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