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मानसून की बेरूखी से खरीफ फसलों पर पड़ रही मार 

Fri, 01 Jul 2016 11:34 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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खेती - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मानसून की बेरूखी ने खरीफ फसलों की बुआई पर असर डाला है। बेहतर मानसून की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार और आर्थिक चिंतकों ने कृषि के अच्छे दिन की दुहाई दी है। लेकिन खरीफ फसलों के बुआई के शुरूआती रुझान उत्साह बढ़ाने लायक नहीं हैं।
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धान की रोपाई पिछले वर्ष के मुकाबले मामूली रूप से ज्यादा है। मगर सामान्य से बेहद कम है। तो मोटे अनाज का मामला भी रूठा हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष मोटे अनाज की बुआई 6.28 लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि कृषि मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि उत्तर भारत में अगले 1 से 2 दिनों में मानसून रफ्तार पकड़ने वाला है। मानसून के रफ्तार पकड़ते ही खरीफ की बुआई भी रफ्तार पकड़ेगी। भारतीय मौसम विभाग ने भी यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और राजस्थान के इलाकों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है।

मानसून के जोर पकड़ते ही धान के रोपाई की रफ्तार बढ़ेगी। 1 जुलाई तक देश में 47.77 लाख हेक्टेयर खेती पर धान की रोपाई हो गई है। यह रोपाई पिछले वर्ष से .15 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। मगर सामान्य रोपाई से 11.85 लाख हेक्टेयर कम है। दलहन की खेती के मामले में भी स्थिति सुनहरी नहीं है।
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दलहन की खेती सामान्य से बेशक ज्यादा है। मगर पिछले वर्ष की तुलना में दलहन की खेती 2.41 लाख हेक्टेयर कम है। मोटे अनाज की खेती भी मुंह फेर रही है। पिछले वर्ष की तुलना में मोटे अनाज की खेती 6.28 लाख हेक्टेयर कम है। तो तिलहन फसल भी मुंह मोडे हुए हैं। तिलहन की खेती पिछले वर्ष से 25.53 लाख हेक्टेयर कम है।

कपास की बुआई से भी किसानों का मोह भंग होता दिख रहा है। पिछले वर्ष की अपेक्षा 29.57 लाख हेक्टेयर पर कपास की खेती कम है। बावजूद उसके कृषि मंत्रालय के अधिकारी खरीफ फसल के अच्छे दिन की उम्मीद जता रहे हैं। मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि मानसून की रफ्तार बढ़ते ही फसल बुआई की गति बढ़ेगी। अभी चिंता की स्थिति नहीं है। इस वर्ष मानसून बेहत्तर रहने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए अच्छी फसल की उम्मीद है।
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