वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया कि जीवाश्म ईंधन जलाने से हो रहा जलवायु परिवर्तन मानसून, चक्रवात और तूफानों को ज्यादा शक्तिशाली और बारिश को अधिक तीव्र बना रहा है। प्रमुख शोधकर्ता अल्बर्ट वैन डिज्क ने बताया कि 2024 का चरम मौसम कोई अकेली घटना नहीं है बल्कि यह बाढ़, लंबे सूखे और रिकॉर्ड तोड़ मौसम की बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है। 111 देशों में लगभग 4 अरब लोगों ने अपने अब तक के सबसे गर्म वर्ष का अनुभव किया। वैज्ञानिकों ने इस तरह के चरम मौसम की घटनाओं के लिए तैयारी करने की जरूरत पर बल दिया है। इसमें मजबूत बाढ़ सुरक्षा, सूखा प्रतिरोधी कृषि, जल आपूर्ति सुनिश्चित करना और बेहतर प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करना शामिल है।
दुनिया में 4 करोड़ लोग हुए विस्थापित और 550 अरब डॉलर का हुआ नुकसान
बाढ़, सूखा, चक्रवात और भूस्खलन जैसी आपदाओं की वजह से 2024 में 8,700 से अधिक लोगों की मौत हुई। वहीं, 4 करोड़ लोग विस्थापित हुए और 550 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ। केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन से 375 लोगों की मौत हुई, 10,000 लोग विस्थापित हुए और 12 अरब रुपये (140 मिलियन यूएसडी) का नुकसान हुआ। वायनाड का भूस्खलन पश्चिमी घाट में बढ़ते भूस्खलन के पैटर्न की तरफ इशारा करता है, यह दिखाता है कि जलवायु मॉडल के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वजह से अधिक तेज बारिश हो रही है।
2024 में दैनिक बारिश के रिकॉर्ड 52 फीसदी अधिक बार टूटे
बांग्लादेश में अगस्त में भारी मानसूनी बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण गंभीर बाढ़ आई। इससे 58 लाख लोग प्रभावित हुए और 10 लाख टन से अधिक चावल नष्ट हो गया। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ब्राजील में भी भारी बारिश हुई। अब बारिश के रिकॉर्ड अधिक बार टूट रहे हैं। 2024 में मासिक बारिश के रिकॉर्ड 21वीं सदी की शुरुआत की तुलना में 27 फीसदी अधिक बार टूटे और दैनिक बारिश के रिकॉर्ड 52 फीसदी अधिक बार टूटे। यहां तक कि रिकॉर्ड में कम बारिश की घटनाएं भी 38 फीसदी बढ़ गईं, जो यह दिखाता है कि बारिश और सूखा दोनों स्थितियों में चरम सीमा देखी जा रही है। दूसरी तरफ दक्षिण अमेरिका में अमेजन बेसिन और दक्षिणी अफ्रीका के क्षेत्रों में विनाशकारी सूखा पड़ा।