देश में पिछले पांच सालों में मोबाइल से लेकर कार, केतली से लेकर आभूषण तक की चोरी हुई है। इन पांच साल में जितना सामान चुराया गया है, उसकी कीमत प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उद्घाटित की गई अटल टनल की लागत से भी दस गुना है। 2015-2019 के बीच 32,892 करोड़ रुपये की लागत का सामान चोरी किया गया है। हालांकि इसका एक चौथाई भी नहीं रिकवर किया गया है।
अगर राज्यों की बात करें तो सबसे ज्यादा चोरी महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में हुई है। इन पांचों राज्यों में चोरी हुए सामान का आंकड़ा 58 फीसदी है। पिछले पांच सालोंं से महाराष्ट्र शीर्ष पर है और पिछले दो सालों से गुजरात शीर्ष पांच में अपनी जगह बनाया हुआ है।
एनसीआरबी की ओर से जारी रिपोर्ट का डाटा बताता है कि घरों में रखा ज्यादा असुरक्षित है। घर के परिसर और रोडवेज में हुए अपराधों की संख्या 63 फीसदी है। अगर मामलों को देखें तो 61 फीसदी मामले ऐसे हैं, जहां चोरी या तो घरों से हुई है या फिर सड़क से।
2019 में चोरी किए गए सामान में 70 फीसदी सामान वाहन, पैसा, आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स हैं। तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी एसपी जनगिद का कहना है कि इस समय दो मुख्य घटक है, एक या तो हिरासत में लिया जाए और दूसरा चोरी किए गए सामान की रिकवरी की जाए।
उन्होंने कहा कि चोरी किए गए सामान को वापस लाना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि तबह तक चोर सामान को या तो बेच चुका होता है या फिर कहीं और इस्तेमाल कर चुका होता है। अगर चोरों को हिरासत में लेनी की कार्रवाई जल्दी की जाए तो चोरी किए गए सामान को रिकवर किया जा सकता है।
2019 में चोरी किए गए सामान में से मात्र 31 फीसदी सामान ही रिकवर किया गया है, जो कि पिछले साल की तुलना में कम है। साल 2018 में कुल चोरी किए गए सामान में से 35 फीसदी सामान वापस ले लिया गया था। जबकि 2017 में 26 फीसदी और 2015 में 16 फीसदी सामान वापस ले लिया गया था।
चोरी के मामलों में लगातार तेजी हो रही है। अगर साल 2015 से तुलना करें तो 2019 में 34 फीसदी मामले बढ़े हैं। पिछले पांच साल में 35.5 लाख चोरी के मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 28 लाख मामले चोरी के, 5.3 लाख मामले सेंध मारने और बाकी डकैती के हैं।