भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक दूसरी लॉन्च साइट स्थापित करने की योजना बनाई है। इसके लिए तमिलनाडु में जमीन का अधिग्रहण किया गया है, जहां एक लॉन्च पैड स्थापित किया जाएगा। अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख ने रविवार को यह जानकारी दी।
इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने बताया, अंतरिक्ष एजेंसी फिलहाल यहां से करीब 650 किलोमीटर दूर थूथुकुडी जिले के कुलसेकरपट्टनम में जमीन का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया में है। एलवीएम3-एम2/वनवेब इंडिया-1 मिशन के तहत 36 सैटेलाइट्स का सफल परीक्षण करने के बाद इसरो प्रमुख ने कहा, दूसरी लॉन्चिंग साइट कुलशेखरपट्टन (तमिलनाडु) में है, इसके लिए हमने पहले ही जमीन का अधिग्रहण कर लिया है। अभी इस जमीन को सुनिश्चित करने के लिए हम चारदीवारी कर रहे हैं।
सोमनाथ ने कहा, लॉन्च पैड के लिए डिजाइन तैयार है। सुरक्षा के लिए एक बार अगर जमीन हमाने नियंत्रण में आ जाती है, तो हम इस पर निर्माण शुरू कर देंगे। एक सवाल के जवाब में इसरो प्रमुख ने कहा कि पूरी निर्माण गतिविधि (कन्स्ट्रक्शन एक्टिविटीज) दो साल में होने की उम्मीद है। चंद्रयान-3 मिशन को लेकर उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष एजेंसी जून-जुलाई 2023 तक लॉन्च विंडो देख रही है।
36 सैटेलाइट्स के सफल परीक्षण के साथ ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोहरी खुशी का माहौल रहा, क्योंकि आज 23 अक्तूबर को इसरो के कुछ वैज्ञानिकों और भारती एंटरप्राइजेज के अध्यक्ष सुनील भारती मित्तल का भी जन्मदिन है। भारती एंटरप्राइजेज वनवेब लिमिटेड, मिशन में प्रमुख निवेशकों और शेयरधारकों में से एक हैं।
जीएसएलवी मार्क-III का नाम बदलकर किया गया एलवीएम-3
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) मार्क-III का नाम बदलकर लॉन्च व्हीकल मार्क-III कर दिया है। LVM-3 रॉकेट का उपयोग भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए भी किया जाएगा। वहीं, एलवीएम3-एम2/वनवेब इंडिया-1 मिशन के तहत 36 सैटेलाइट्स का सफल परीक्षण किया गया।
इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इससे पहले, प्रक्षेपण वाहनों को एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए नामित किया गया था, जैसे कि पीएसएलवी ध्रुवीय उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने के लिए या जीएसएलवी भूस्थिर उपग्रहों के लिए। रॉकेट का नाम बदलने का निर्णय प्रक्षेपण के लिए पहचानी गई कक्षाओं के प्रकार के बारे में भ्रम को दूर करना था। GSLV मार्क- III या LVM3 का उपयोग 2019 में चंद्रयान -2 मिशन को चंद्रमा पर लॉन्च करने के लिए किया गया था।