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Land For Job Scam: लालू यादव ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख, निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग

Thu, 17 Jul 2025 05:38 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जमीन के बदले नौकरी मामले में सीबीआई ने 18 मई 2022 को लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी, दो बेटियों, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग को लेकर लालू प्रसाद यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। 
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लालू यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार के पूर्व सीएम और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने जमीन के बदले नौकरी मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ 18 जुलाई को इस मामले पर सुनवाई कर सकती है।
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इससे पहले लालू यादव की इस मांग को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि कार्यवाही पर रोक लगाने का कोई ठोस कारण नहीं है। उच्च न्यायालय ने सीबीआई को नोटिस जारी किया था और सुनवाई 12 अगस्त के लिए स्थगित कर दी थी।


नौकरी के बदले जमीन का मामला क्या?
अधिकारियों ने बताया कि यह मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप-डी की नियुक्तियों से संबंधित है। यह नियुक्ति 2004 से 2009 के बीच लालू के रेल मंत्री रहने के दौरान की गई थी। इन नियुक्तियों के बदले में लोगों ने राजद सुप्रीमो के परिवार या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े उपहार में दिए या हस्तांतरित किए। 18 मई 2022 को लालू और उनकी पत्नी, दो बेटियों, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
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याचिका में लालू प्रसाद यादव ने क्या कहा?
उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में लालू  प्रसाद यादव ने सीबीआई की एफआईआर और 2022, 2023 और 2024 में दायर तीन आरोपपत्रों और संज्ञान आदेशों को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा है कि रिपोर्ट 14 साल की देरी से 2022 में दर्ज की गई। जबकि सीबीआई ने प्रारंभिक पूछताछ और जांच सक्षम अदालत के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के बाद बंद कर दी गई थी। उन्होंने कहा है कि पिछली जांच और उसकी क्लोजर रिपोर्ट को छुपाकर नई जांच शुरू करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। उन्होंने तर्क दिया है कि उनको अवैध जांच से कष्ट सहना पड़ रहा है। जो निष्पक्ष जांच के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। वर्तमान जांच और पूछताछ दोनों ही गैर-कानूनी हैं, क्योंकि दोनों ही अनिवार्य अनुमोदन के बिना शुरू की गई हैं। इस तरह की मंजूरी के बिना की गई कोई भी जांच शुरू से ही अमान्य होगी।
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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल चुकी 
इससे पहले कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाले से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 14 मई को दिल्ली की एक अदालत को बताया था कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर मुकदमा चलाने के मंजूरी मिल गई है। यह घोटाला उस समय हुआ था, जब लालू प्रसाद केंद्रीय रेल मंत्री थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 8 मई को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू पर मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। राष्ट्रपति ने सीआरपीसी की धारा 197(1) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218) के तहत अनुमति प्रदान की थी। 

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