सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों की सुनवाई कर रही संविधान पीठ से एक जज को हटाने की मांग को और कुछ नहीं बल्कि ‘पीठ का शिकार’ करना बताया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि इसकी इजाजत दी गई, तो ‘संस्थान नष्ट’ हो जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि जस्टिस अरुण मिश्रा को पांच जजों की संविधान पीठ से हटाया गया, तो यह इतिहास में एक काला अध्याय होगा। यह न्यायपालिका को वश में करने के लिए हमला है। पीठ में शामिल अन्य जज जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत शरण, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एस रविंद्र भट ने कहा कि पीठ से जस्टिस मिश्रा को हटाने पर फैसला 23 अक्तूबर को सुनाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ किसान संगठनों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान से कहा कि यह पीठ का शिकार करने का प्रयास है। आप पीठ में अपनी पसंद का व्यक्ति चाहते हैं। यह एक गंभीर मसला है और इतिहास कहेगा कि एक वरिष्ठ वकील भी इस प्रयास शामिल था। इस पर दीवान ने कहा कि एक जज को पूर्वाग्रह की आशंका को देखते हुए सुनवाई से हट जाना चाहिए। अन्यथा जनता का भरोसा उठ जाएगा और इसलिए वह संस्थान की इमानदारी को बरकरार रखने के लिए जज को हटाने का निवेदन कर रहे हैं। दीवान और अन्य वकीलों ने कहा कि जस्टिस मिश्रा को इस केस से खुद को अलग कर लेना चाहिए, क्योंकि पिछले साल सुनाए गए फैसले का वह हिस्सा थे। उस फैसले में उन्होंने अपने मन की बात कही थी।
कुछ ताकतें कोर्ट को खास तरीके से चलाना चाहते हैं : जस्टिस मिश्रा
सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने पाया कि उनको पीठ से हटाने की याचिका प्रायोजित है। उन्होंने कहा, यदि हम ऐसे प्रयासों के आगे झुक गए तो यह इतिहास में सबसे काला अध्याय होगा। ये ताकतें कोर्ट को किसी खास तरीके से चलाना चाहती हैं। इस संस्थान के साथ जो कुछ हो रहा है वह हैरान करने वाला है।