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लक्षद्वीप के 'मुस्लिमों' की कहानी: प्रशासक पटेल हैं प्रधानमंत्री के बेहद खास, आरएसएस व खुफिया एजेंसी की मानेंगे सलाह!

Fri, 11 Jun 2021 05:34 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सफेद समुद्री 'बीच' यानी तटों के लिए मशहूर लक्षद्वीप के 70 हजार से अधिक लोगों के मन में गुस्सा और डर पैदा किया जा रहा है। पटेल के प्रस्तावित कानूनों में जिनका सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है, उनमें 'लक्षद्वीप असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम विनियमन' है। इसके अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को एक साल तक बिना कारण बताए गिरफ्तार किया जा सकता है...
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लक्षद्वीप प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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सफेद समुद्री तटों की खूबसूरती समेटे 'लक्षद्वीप', जहां 96 फीसदी आबादी मुस्लिम है। कुछ दिनों से यहां पर दो तरह की बातें चल रही हैं कि लक्षद्वीप के मुस्लिम 'बर्बाद होंगे या आबाद'। लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल कहते हैं कि हम इस द्वीप को मालदीव की तरह एक बड़ा पर्यटन स्थल बना देंगे। यहां का भरपूर विकास होगा। दूसरी तरफ राहुल गांधी से लेकर 93 पूर्व नौकरशाह 'पटेल' की मंशा पर सवाल उठा चुके हैं। अगर विकास होना है तो ऐसा कानून क्यों बना रहे हैं कि किसी व्यक्ति को बिना कारण बताए एक साल तक जेल में डाल देंगे। जिनके दो से ज्यादा बच्चे हुए तो वे पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इस तरह के नए भूमि अधिगृहण कानून बनाए जा रहे हैं, जो इस द्वीप की अनूठी संस्कृति और परंपरा को खत्म कर देंगे। सफेद समुद्री तट पर प्रधानमंत्री के बहुत खास 'पटेल' इन सवालों का जवाब नहीं दे रहे। वे आरएसएस एवं खुफिया एजेंसी की सलाह मानने को आतुर दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अभी प्रशासक 'पटेल' का ड्रॉफ्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है। संभव है कि उसमें कुछ परिवर्तन हों, लेकिन लक्षद्वीप के मुस्लिमों की कहानी में अब बदलाव आना लगभग तय माना जा रहा है।

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पटेल के ड्रॉफ्ट में बदलावों की संभावना खत्म नहीं हुई है...  

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल द्वारा भेजे गए ड्रॉफ्ट में बदलावों की संभावना खत्म नहीं हुई है। इस पर विचार किया जा रहा है। देश के पूर्व 93 नौकरशाह, जिन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी, उनकी बात पर गौर किया जा सकता है। सफेद समुद्री 'बीच' यानी तटों के लिए मशहूर लक्षद्वीप के 70 हजार से अधिक लोगों के मन में गुस्सा और डर पैदा किया जा रहा है। पटेल के प्रस्तावित कानूनों में जिनका सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है, उनमें 'लक्षद्वीप असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम विनियमन' है। इसके अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को एक साल तक बिना कारण बताए गिरफ्तार किया जा सकता है। दूसरा, यहां पर 96 फीसदी मुस्लिम हैं। बीफ पर प्रतिबंध लगाने का मतलब समझा जा सकता है। दो से ज्यादा बच्चे हैं तो पंचायत चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगा दी जाएगी। भूमि अधिग्रहण से जुड़े नियमों में जो बदलाव होंगे, उनसे द्वीप की विरासत ही खतरे में पड़ जाएगी। मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि उक्त नियमों में बदलाव किया जा सकता है। प्रस्तावित ड्राफ्ट को अंतिम मंजूरी मिलने से पहले यह देखा जाएगा कि लक्षद्वीप के विकास मॉडल में स्थानीय लोगों की सोच शामिल हो।

लोगों की इच्छा के खिलाफ कानून लागू नहीं होगा: फैजल  

लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल मानते हैं कि केंद्र शासित क्षेत्र के प्रशासक पटेल गलत कर रहे हैं। उनका निशाना मुस्लिम समुदाय है। यहां अपराध का ग्राफ कितना है, एनसीआरबी की रिपोर्ट देख लें। बाहरी देश की कोई गतिविधि यहां नहीं है। लोगों का अपने देश के प्रति अटूट प्रेम है। इसके बावजूद लक्षद्वीप में लोगों की इच्छा के खिलाफ मनमर्जी के कानून थोपने का प्रयास किया जा रहा है। देश के पूर्व नौकरशाह बता चुके हैं कि पटेल द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट लक्षद्वीप के सामाजिक और धार्मिक ताने-बाने के विपरित है। फैजल ने कहा, प्रस्तावित कानून का विरोध क्यों हो रहा है, इस बाबत गृह मंत्री अमित शाह को जानकारी दे दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि लक्षद्वीप में कोई भी नया कानून तभी लागू होगा, जब वहां के स्थानीय प्रतिनिधि उस पर अपनी सहमति दे देंगे। कांग्रेस से जुड़े एक नेता बताते हैं कि यहां पर आरएसएस का एजेंडा लागू किया जा रहा है। उसमें 'मुस्लिम' शब्द ही सब कुछ बयां कर देता है। खुफिया एजेंसी की सलाह को आधार बनाया जा रहा है। बतौर फैजल, क्या इससे पहले कभी किसी खुफिया एजेंसी ने यहां के बारे में ऐसी सलाह दी है कि जिससे लक्षद्वीप में अंग्रेजी सरकार वाला कानून लागू कर दो। प्रशासक पटेल ने हाल ही में एक नया आदेश जारी कर दिया। मछली पकड़ने के लिए जो नाव समुद्र में जाती है, उस पर सरकारी कर्मी बैठे रहेंगे। कारण पूछा तो कहा, खुफिया एजेंसी की सलाह पर ऐसा कर रहे हैं। जब लक्षद्वीप के सफेद तटों पर लोगों ने इसका विरोध किया तो प्रशासक पटेल को आदेश वापस लेना पड़ा।
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प्रधानमंत्री के 'खास' माने जाते हैं 'पटेल' ...

लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल के पटेल, प्रधानमंत्री मोदी के खास बताए जाते हैं। उन्हें एक विशेष मकसद के तहत यहां लाया गया है। साल 2010 में जब गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह को जेल जाना पड़ा था तो मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी जगह पर प्रफुल्ल पटेल को गृह मंत्रालय सौंप दिया। वे 2012 के विधानसभा चुनाव तक गृह मंत्री के पद पर रहे। पटेल, विधानसभा चुनाव नहीं जीत सके थे। पटेल के पिता आरएसएस से सक्रिय तौर पर जुड़े हुए थे। मोदी उनसे मिलते रहते थे। केंद्र ने 2016 में दमन एवं दीव और दादरा एवं नगर हवेली को मिलाकर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाने का निर्णय लिया तो पटेल को ही प्रशासक नियुक्त किया गया था। आईएएस गोपीनाथन के साथ उनका विवाद चर्चा में रहा था। पटेल कहते हैं, लक्षद्वीप में मादक पदार्थों की तस्करी और हथियारों के अवैध कारोबार को रोकने के लिए असामाजिक गतिविधि निरोधक अधिनियम (पासा) लागू करना जरूरी था। मालदीव की तर्ज पर जब लक्षद्वीप का विकास होगा तो उसका लाभ स्थानीय लोगों को ही पहुंचेगा। पटेल ने अभी जो भी काम किए हैं, उनके विरोधी, उसमें 'मुस्लिम और सुरक्षा एजेंसियां' ये शब्द तलाश लेते हैं। पटेल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुत करीबी हैं। उन्हें यहां पर एक टारगेट मिला है। वह उसे पूरा कर रहे हैं। इसमें उनके साथ आरएसएस है, सुरक्षा एजेंसी हैं, केंद्रीय गृह मंत्रालय है, नहीं है तो लक्षद्वीप का मुस्लिम समुदाय। लक्षद्वीप के लोगों को भरोसा है कि पटेल के उस प्रस्तावित कानून को मंजूरी नहीं मिलेगी, जिसे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाकर तैयार किया गया है।
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