सम्मान हासिल करने के लिए इस दौर में जहां लोग एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं, वहीं फक्कड़ मिजाज पं. लच्छू महाराज ने पद्मश्री सम्मान ठुकरा दिया था। बड़े गुलाम अली, सितार के शहंशाह रहे भारत रत्न पं. रविशंकर समेत देश-दुनिया के नामचीन कलाकारों के साथ संगत करने वाले पं. लच्छू महाराज ने अपने लिए कभी कुछ नहीं मांगा।
वह जीवन भर ईमानदारी और रियाज के बल पर आगे बढ़ने की वकालत करते रहे। वर्ष 1992 में जब केंद्र में प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के नेतृत्व वाली सरकार थी तब तबला वादक पं. लच्छू महाराज को पद्मश्री सम्मान के लिए नामित किया गया था।
उनके भाई राजेंद्र सिंह बताते हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अधिकारी को इस सिलसिले में दिन के 11 बजे दालमंडी स्थित मेरे आवास पर आना था। ऐसी सूचना पीएमओ से ही आई थी। अफसर को 11 बजे का पं. लच्छू महाराज ने समय दिया था लेकिन जब वह घर पहुंचे, तब दोपहर के दो बज चुके थे।