संसद में पारित तीन श्रम कानूनों को श्रमिक विरोधी करार देते हुए कांग्रेस ने कहा कि ये विधेयक ट्रेड यूनियन को कमजोर करेंगे और श्रमिकों के लिए सुरक्षा जाल को खत्म करेंगे। विधेयकों पर सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को कहा, 'सरकार का यह दावा बिल्कुल झूठा है कि ये विधेयक कारोबारी सुगमता बढ़ाएंगे। ये विधेयक ट्रेड यूनियनों को कमजोर करेंगे और कर्मचारियों की सुरक्षा को खत्म करेंगे। इन कानूनों के जरिये केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण करना चाहती है। ये विधेयक कर्मचारी विरोधी, श्रमिक विरोधी है और इनके खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए। सभी दलों को एकजुट होकर इनका विरोध करना चाहिए। मोदी सरकार सिर्फ कॉरपोरेट की आवाज सुनती है और इन कानूनों के बाद वह ट्रेड यूनियन की आवाज भी नहीं सुनेगी।'
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, 'मोदी सरकार एक के बाद एक वर्ग के हितों के साथ विश्वासघात कर रही है। किसानों के साथ नाइंसाफी का मुद्दा चल ही रहा था कि सरकार ने किसानों की तरह श्रमिकों के साथ विश्वासघात किया है। लोकतांत्रिक मूल्यों को दरकिनार करना और लोगों पर अपने फैसले थोपना इस सरकार के डीएनए में है। सरकार ने जल्दबाजी में संसद से विधेयकों को पारित करवाया। भारतीय नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष संजीव रेड्डी ने आरोप लगाया कि इन विधेयकों में कर्मचारियों व श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इन विधेयकों के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे।