मुंबई के कुर्ला में बीते कुछ दिन पहले एक भीषण सड़क हादसा हुआ था। इस हादसे में आठ लोगों की जान गई थी। बताया जा रहा था कि बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाइ और ट्रांसपोर्ट (बेस्ट) की बस के ब्रेक फेल होने की वजह से हादसा हुआ। हालांकि, बाद में बेस्ट के चालकों के शराब पीने का वीडियो वायरल हो गया था। इससे लोगों में गुस्सा भड़क गया। हालांकि, अब बस चालक की मेडिकल रिपोर्ट आ गई है। बताया जा रहा कि चालक ने न तो शराब पी रखी थी और न ही उसे कोई मानसिक बीमारी है।
पुलिस न बुधवार को कहा कि बस चालक को किसी भी तरह की कोई मानसिक बीमारी नहीं निकली है। यहां तक कि हादसे के दौरान उसने शराब भी नहीं पी रखी थी।
कार, बाइक, ऑटो और लोगों को भी मौत बन रौंदती चली गई थी बस
बता दें, नौ दिसंबर की घटना के भयावह दृश्य सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गए थे, जिसमें देखा जा सकता कि एक बेकाबू बस ने पहले एक ऑटो को टक्कर मारी और फिर एक के बाद एक गाड़ियों को टक्कर मारती चली गई। कई पैदल यात्री और फेरीवाले भी बस की चपेट में आए गए। थोड़ी देर में ही सड़क पर लोगों की चीख-पुकार मच गई थी। इस भयावह हादसे में आठ लोगों की मौत हुई थी, जबकि 40 घायल हुए थे। 54 साल के संजय मोरे पुलिस हिरासत में हैं। उन पर लापरवाही तरीके से बस चलाने और बड़ी संख्या में लोगों की गैर इरादतन हत्या करने का आरोप है।
बस चालक की रिपोर्ट से खुलासा
कुर्ला पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सुनवाई शुरू होने से पहले सायन में नगर निगम के अस्पताल में चालक का मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया गया ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे कोई मानसिक बीमारी तो नहीं है। रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि उसकी मानसिक स्थिति सामान्य है। उसे कोई मानसिक बीमारी नहीं है और वह दिमाग से संबंधित किसी बीमारी से पीड़ित नहीं है। इसके अलावा, मोरे की रक्त जांच रिपोर्ट से भी पता चला है कि दुर्घटना के समय वह शराब के नशे में गाड़ी नहीं चला रहा था।
इससे पहले, मोरे ने दावा किया था कि बस के ब्रेक फेल हो गए थे, इसी वजह से हादसा हुआ। मगर, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से पुलिस को एक रिपोर्ट मिली है, जिसमें बताया गया है कि वाहन ठीक से काम कर रहा था और ब्रेक फेल नहीं हुआ था या कोई अन्य तकनीकी खराबी नहीं थी।
तीन दिन का मिला था प्रशिक्षण
बेस्ट प्रशासन ने दावा किया है कि मोरे को इलेक्ट्रिक बस चलाने की अनुमति देने से पहले तीन दिन का प्रशिक्षण मिला था। आरटीओ अधिकारियों को संदेह है कि मानवीय चूक और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन बसों को चलाने के लिए उचित प्रशिक्षण की कमी दुर्घटना का कारण हो सकती है, जो हाल के इतिहास में बेस्ट बसों से जुड़ी सबसे भयानक दुर्घटनाओं में से एक है।