2014 के लोकसभा चुनाव में ज्यादातर राज्यों में विपक्ष के अलग-अलग लड़ने से भाजपा को अपने दम पर बहुमत हासिल करने में सफलता मिली थी। 1999 के चुनाव में भाजपा 29 फीसदी से अधिक वोट हासिल करने के बावजूद 182 सीटें ही जीत पाई थी। 2014 में भाजपा महज 31 फीसदी वोट हासिल कर 283 सीटें जीतने में कामयाब रही। अब यूपी में सपा और बसपा ने हाथ मिलाया है, तो कर्नाटक में कांग्रेस, जदएस की बी टीम बनने के लिए तैयार हो गई है। ऐसे में पवार और ममता की कोशिश दूसरे राज्यों में भी बड़े दलों के नेतृत्व में भाजपा के खिलाफ मोर्चा बनाने की है। संयुक्त विपक्ष भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
भाजपा ने ‘काला दिन’ बताया
बंगलूरू। कर्नाटक में कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जदएस गठबंधन की सरकार के शपथ लेने को भाजपा ने ‘काला दिन’ बताया है। पार्टी ने कांग्रेस में हाशिए पर चल रहे नेताओं से भाजपा में शामिल होने को कहा है। वहीं पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा इसे ‘अवसरवादी गठबंधन’ की सरकार बताया है। उन्होंने कहा, राज्य किसानों पर 53,000 करोड़ का कर्ज है। आपने इस माफ करने की बात कही है। हम देखेंगे कि आप कर्ज माफ करते हैं या नहीं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पार्टी राज्य भर में प्रदर्शन करेगी।
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। बीजद की ओर से कहा गया कि वह ऐसे आयोजनों में नहीं जाते। पार्टी महासचिव अरुण कुमार साहू ने कहा कि पार्टी भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी बनाकर चल रही है। बीजद एक विशुद्ध क्षेत्रीय दल है और इसका कांग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों से कोई लेनादेना नहीं है।
हम सभी क्षेत्रीय दलों के संपर्क में रहेंगे। ताकि देश के विकास, लोगों के विकास और संघीय तानेबाने के विकास के लिए काम कर सकें। हमारा मिशन और विजन साफ है। हम एक दूसरे से बात करें। एक-दूसरे के राज्य में जाएं ताकि देश के भविष्य को और ताकत दी जा सके। - ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल
हम अपनी एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं। भविष्य में भी हम मिलकर काम करेंगे और देश को आगे बढ़ाएंगे। यही हमारा एजेंडा है। हम ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रीय दलों को आगे बढ़ाना और मजबूती देना चाहते हैं। - एन चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री आंध्र प्रदेश