आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम की मुश्किलें बरकरार है। मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी और गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से भी इनकार कर दिया। वहीं बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी अग्रिम जमानत याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने चिदंबरम के पक्ष में बयान दिया है। वहीं आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास ने भी चिदंबरम पर तंज कसा और कहा कि आप कानून से भागकर अपना और अपनी पार्टी का पक्ष कमजोर कर रहे हैं। निर्दोष हैं तो मैदान में लड़िए।
कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया ट्विटर पर लिखा, "जांच राजनीति प्रेरित हो सकती है। आज के गृहमंत्री/प्रधानमंत्री के खिलाफ वर्षों होती रही है! लेकिन राजनीति में होकर देश के पूर्व कानून/गृहमंत्री/वित्तमंत्री जी, कानून से भागकर आप अपना और अपने दल का पक्ष कमजोर ही कर रहे हैं! निर्दोष हैं तो मैदान में लड़िए।"
हाईकोर्ट ने माना मुख्य साजिशकर्ता
चिदंबरम के वकील ने मंगलवार को अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करने के आदेश पर तीन दिन का स्टे देने की मांग भी की थी, लेकिन अदालत ने इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि तथ्यों से पता चलता है कि आईएनएक्स मीडिया घोटाले में चिदंबरम प्रमुख साजिशकर्ता थे। हाईकोर्ट का प्रथम दृष्टया मानना है कि प्रभावी जांच के लिए चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी है।
चिदंबरम ने कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित कहा
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चिदंबरम ने कहा कि आईएनएक्स मीडिया मामले में उन्हें कर्ता-धर्ता बताने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय की टिप्पणी पूरी तरह निराधार है और इस मामले में दर्ज प्राथमिकी 'राजनीति से प्रेरित और प्रतिशोध की कार्रवाई है।'
सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अलग-अलग कैविएट याचिका दायर की जिससे चिदंबरम की मुश्किलें बढ़ गईं। कैविएट याचिका दाखिल होने के बाद कोर्ट को सभी पक्षों का मत जानना जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट में दायर स्पेशल लीव पिटीशन में खामी होने के कारण सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने सीजेआई रंजन गोगोई के सामने केस को लिस्ट नहीं किया था हालांकि, अब उस खामी को दूर कर लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि चिदंबरम की अंतरिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। अब अगले दो दिन चिदंबरम के लिए मुश्किल भरे रहेंगे। सीबीआई और ईडी की टीमें उनके पीछे हैं और उनका कोई अता पता नहीं है।