कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम पिछले कुछ वर्षों से लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। एयरसेल-मैक्सिस डील हो या फिर आईएनएक्स मीडिया मामला, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उनकी भूमिका की जांच कर रहे हैं। 20 अगस्त को सीबीआई और ईडी दिल्ली के जोरबाग स्थित उनके घर पहुंची तो वो नहीं मिले। 21 अगस्त को चिदंबरम के वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, पर वहां से भी राहत नहीं मिली।
पूरा नामः पलानियाप्पम चिदंबरम (Palaniappan Chidambaram)
जन्म: 16 सितंबर 1945
जन्मस्थानः शिवगंगा, तमिलनाडु
पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) भारतीय राजनीति की अहम शख्सियत रहे हैं। अपने नॉलेज और आगे बढ़ने की जीजिविषा से वे तमिलनाडु की राजनीति से ऊपर उठकर देश के अहम मंत्रालयों के सिरमौर बने। उन्होंने कई बड़े मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। तत्कालीन प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने चिदंबरम को वित्त जैसे अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी दी थी। बाद में चिदंबरम तीन साल गृहमंत्री भी रहे। राजनीति की रपटीली राहों से गुजरते हुए भी उन्होंने वकालत का जुनून नहीं छोड़ा।
तमिलनाडु के कनाडुकथन गांव में जन्मे चिदंबरम के दो भाई और एक बहन हैं। चिदंबरम ने चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज से सांख्यिकी में बीएससी और मद्रास लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री हासिल की। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए किया। मद्रास हाईकोर्ट में वकील रहे। सुप्रीम कोर्ट में भी वकालत की है।
सीबीआई ने मीडिया कंपनी आईएनएक्स मीडिया (INX Media) के खिलाफ 15 मई, 2017 को एक एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को 305 करोड़ रुपये के विदेशी फंड लेने के लिए फॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी में कई तरह की अनियमितताएं बरती गईं।
केंद्रीय जांच एजेंसी 3500 करोड़ रुपये के एयरसेल मैक्सिस सौदे में भी चिदंबरम की भूमिका की जांच कर रही है। साल 2006 में मलेशियाई कंपनी मैक्सिस ने एयरसेल में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली थी। इस मामले में रजामंदी देने को लेकर चिदंबरम पर अनियमितताएं बरतने का आरोप है।
वो 2006 में हुए इस सौदे के वक्त पहली यूपीए सरकार में वित्त मंत्री थे। 2जी से जुड़े इस केस में चिदंबरम और उनके परिवार पर हवाला मामले में केस दर्ज है।
आरोप है कि विदेशी निवेश को स्वीकृति देने की वित्त मंत्री की सीमा महज 600 करोड़ है फिर भी 3500 करोड़ रुपये के एयरसेल-मैक्सिस डील को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की इजाजत के बिना पास कर दिया गया।