करीब 5000 साल पहले द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा में जन्म लिया। इसके बाद से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर प्रभु जन्म की लीला ब्रज के साथ-साथ देश-विदेश में भी साकार होती है।
विदेशों में रहने वाले श्रद्धालु मथुरा में तैयार होने वाले श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का पूजन जन्मोत्सव के दौरान करते हैं। ऐसे में जन्माष्टमी की तिथि नजदीक आते ही विदेशों से प्रभु के लड्डू गोपाल स्वरूप की मांग आने लगी है।
मथुरा और वृंदावन के लड्डू गोपाल (पीतल से तैयार भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप) देश और विदेश में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की शोभा बढ़ाएंगे। इसके लिए मथुरा में कारीगर जुटे हैं। अमेरिका, कनाडा, मलेशिया के लिए कई आर्डर डिलीवर भी किए जा चुके हैं।
कारोबारी अजय गोयल ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा में तैयार होने वाले लड्डू गोपाल के स्वरूपों की विदेशों तक खासी मांग है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, मलेशिया, इंडोनेशिया सहित कई देशों के अप्रवासी भारतीय और कृष्णभक्त ब्रज के लड्डू गोपाल के साथ जन्माष्टमी मनाते हैं।
एक्सपोर्टर मथुरा से कंसाइनमेंट तैयार कर विदेश भिजवाते हैं। आर्डर आने शुरू हो गए हैं। इसके अलावा देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु भी अपने साथ लड्डू गोपाल के स्वरूप को अपने साथ ले जाते हैं।
30 रुपये से 300 तक रेंज
बाजार में लड्डू गोपाल के स्वरूप 30 रुपये से लेकर 300 रुपये तक रेंज में उपलब्ध हैं। इस पर मुकुट, हार, नेत्र, पोशाक का शृंगार भी किया जाता है। शृंगार की कीमत भी 20 रुपये से लेकर 150 रुपये तक है।
तीन महीने में तीन करोड़ का कारोबार
जन्माष्टमी के अवसर पर लड्डू गोपाल स्वरूपों का कारोबार तीन माह तक चलता है। करीब तीन करोड़ का टर्नओवर होता है। इस कारोबार में मूर्तियों की फिनिशिंग में सैकड़ों मजदूरों को रोजगार भी मिलता है।