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Koregaon Bhima Violence: प्रकाश आंबेडकर ने दिया शरद पवार के पत्र का हवाला, कहा- जांच आयोग उन्हें करे तलब

Fri, 21 Feb 2025 07:29 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे

सार

आंबेडकर ने कहा कि 2020 में पवार ने तत्कालीन सीएम उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा था। इसमें आरोप लगाया गया कि हिंसा उस समय सत्ता में फडणवीस सरकार की साजिश का परिणाम थी। उन्होंने आयोग से पवार को दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश देने के लिए कहा।
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प्रकाश आंबेडकर - फोटो : ANI
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विस्तार
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कोरेगांव भीमा हिंसा मामले की जांच कर रहे आयोग से वंचित बहुजन अघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने एनसीपी (सपा) के प्रमुख शरद पवार को तलब करने की मांग की है। आयोग को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि 2018 में हुई हिंसा के बाद शरद पवार ने 2020 में तत्कालीन सीएम उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था। इस पत्र को दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में आयोग के सामने लाया जाए। 

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आंबेडकर ने कहा कि 2020 में पवार ने तत्कालीन सीएम उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा था। इसमें आरोप लगाया गया कि हिंसा उस समय सत्ता में फडणवीस सरकार की साजिश का परिणाम थी। उन्होंने आयोग से पवार को दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश देने के लिए कहा। आंबेडकर ने कहा कि यह पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के पास हो सकता है और जरूरत पड़ने पर पवार को तलब किया जा सकता है।

आंबेडकर ने आयोग को अपने पत्र में कहा कि पवार ने आयोग के समक्ष गवाही दी है, लेकिन किसी भी प्रकार के दस्तावेज जमा नहीं किए हैं। जनवरी 2020 में मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पवार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को दो पेज का पत्र लिखा था। पत्र में पवार ने कोरागांव भीमा में हिंसा को तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार की साजिश करार दिया था। ऐसे में पवार द्वारा ठाकरे को लिखा गया पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेजी सबूत, यदि उपलब्ध हों, तो आयोग के सामने आने चाहिए। ये दस्तावेज आयोग को हिंसा के मूल कारण तक जाने और फैसले पर पहुंचने में मदद करेंगे।
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2018 में भड़की थी हिंसा
पुणे पुलिस के अनुसार, 1 जनवरी, 2018 को कोरेगांव भीमा की 1818 की लड़ाई की द्विशताब्दी वर्षगांठ के दौरान युद्ध स्मारक के पास जाति समूहों के बीच हिंसा भड़क उठी थी। दलित संगठन लड़ाई में पुणे के पेशवाओं पर ईस्ट इंडिया कंपनी की जीत का जश्न मनाते हैं क्योंकि कुछ ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, ब्रिटिश सेना में मुख्य रूप से उत्पीड़ित महार समुदाय के सैनिक शामिल थे। हालांकि, कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने जश्न का विरोध किया था, जिसके कारण हिंसा हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य, जिनमें 10 पुलिसकर्मी घायल हो गए।
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तत्कालीन देवेंद्र फडणवीस सरकार ने हिंसा की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश जेएन पटेल की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था।



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