अगर आपने कभी नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन नहीं किए हैं तो निराश मत होइए। इस बार पश्चिम बंगाल में कोलकाता के पूजा मंडप में आप पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। कोलकाता की श्रीगोरखनाथ सेवा समिति ने इस बार अपनी स्थापना के गोल्डन जुबली के असवर पर दुर्गापूजा में श्रीश्री पशुपतिनाथ मंदिर की थीम पर पंडाल सजाया है।
इस मौके पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन भी किया जा रहा है। इसमें भारत सहित नेपाल के प्रसिद्ध संगीतकार और गायक हिस्सा ले रहे हैं। इस बार कोलकाता की दुर्गापूजा खास है, क्योंकि यूनेस्को ने कोलकाता की दुर्गापूजा को सांस्कृतिक विरासत घोषित किया है। इसलिए लोगों का उत्साह भी दोगुना हो गया है।
कार्यक्रम की आयोजन समिति के अध्यक्ष केशव अधिकारी क्षेत्री ने बताया कि यह श्रीगोरखनाथ सेवा समिति का पचासवां दुर्गापूजा उत्सव है। हम इस बार अपना गोल्डन जुबली वर्ष मना रहे हैं। हमारे पूर्वजों ने अपनी विरासत और संस्कृति को बनाए रखने के लिए अथक परिश्रम किया। हमारा फर्ज बनता है कि हम इसे आगे लेकर जाएं। इस बार हमने श्रीश्री पशुपतिनाथ मंदिर की थीम रखी है।
उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत का सबसे अहम हिस्सा है। हम अपनी आने वाली पीढ़ी को दिखाना चाहते हैं कि हम किस परंपरा के वाहक हैं। इसके साथ ही हम एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन करेंगे। कार्यक्रम की आयोजन समिति के महासचिव मोहन कुमार सिंह ने बताया कि मूल कार्यक्रम 30 सितंबर से शुरू होकर सात सितंबर तक चलेगा।
उन्होंने बताया कि इस थीम के पीछे हमारी सोच यह है कि गोल्डन जुबली के अवसर पर कुछ हटकर किया जाए। जिन लोगों को श्रीश्री पशुपतिनाथ मंदिर के बारे में जानकारी नहीं है, वे इस पंडाल को देखने के बाद अपनी सांस्कृतिक विरासत को जानेंगे, खास तौर पर हमारी युवा पीढ़ी।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास, वीपी कोईराला फाउंडेशन नई दिल्ली, संयुक्त नेपाली केंद्रीय सेवा संघ, नेपाली व्यावसायिक समिति कोलकाता, नेपाली महावाणिज्य दूतावास कोलकाता, भारत-नेपाल जनमैत्री सांस्कृतिक मंच कोलकाता, संयुक्त नेपाली वेलफेयर ट्रस्ट कोलकाता, पश्चिम बंगाल राज्य सरकार और कोलकाता कार्पोरेशन वार्ड नंबर 46 के सहयोग से किया जा रहा है। इस मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष केशव अधिकारी क्षेत्री के साथ अरुण पांडेय, नर बिक्रम थापा और सीवी श्रेष्ठा आदि भी मौजूद थे।