बारासात मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सड़क हादसे में मृत युवक के शव की एक आंख गायब मिलने का मामला सामने आया, जिसके बाद अस्पताल में हंगामा हो गया। परिजनों ने पोस्टमार्टम में लापरवाही का आरोप लगाया।
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना स्थित बारासात मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में मंगलवार को बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया। सड़क हादसे में मृत युवक प्रीतम घोष के शव को लेने पहुंचे परिजनों ने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम के बाद शव की एक आंख गायब थी। यह आरोप लगते ही अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हो गया और लोगों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। घटना ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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परिजनों के मुताबिक जब शव पोस्टमार्टम के बाद सौंपा गया, तब उन्होंने देखा कि मृतक की एक आंख मौजूद नहीं थी। परिजनों ने तत्काल अस्पताल अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। आरोप है कि अधिकारियों ने शुरुआत में इसे टालने की कोशिश की और कहा कि संभव है आंख चूहे ने खा ली हो। इस बयान के सामने आते ही मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और अस्पताल के बाहर भीड़ जमा होने लगी।
अस्पताल की सफाई और जांच कमेटी गठित
अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एक जांच कमेटी बनाने की घोषणा की। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने बताया कि परिजनों से लिखित शिकायत ले ली गई है और अब सीसीटीवी फुटेज, मॉर्ग रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम प्रक्रियाओं की जांच की जा रही है। अधिकारी ने कहा कि यदि किसी की लापरवाही सामने आती है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जांच कमेटी को जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
परिजनों के आरोपों ने बढ़ाई चिंता
परिजनों का कहना है कि यह कोई सामान्य लापरवाही नहीं है बल्कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया में गंभीर कमी का मामला है। उनका आरोप है कि युवक के शव के साथ उचित तरीके से व्यवहार नहीं किया गया। जैसे-जैसे इलाके में इसकी खबर फैली, दर्जनों लोग अस्पताल के बाहर एकत्रित हुए और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। भीड़ ने मांग की कि दोषियों को तुरंत निलंबित कर कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री का काफिला फंसा
हंगामा उस समय और बढ़ गया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काफिला उसी मार्ग से गुजर रहा था और प्रदर्शन के कारण कुछ देर के लिए रुक गया। मुख्यमंत्री ने मौके पर अधिकारियों से घटना की जानकारी ली और बाद में मृतक के परिजनों से भी बातचीत की। उन्होंने परिजनों को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया और कहा कि दोषी किसी भी स्तर का हो, कार्रवाई तय है। साथ ही मुख्यमंत्री ने मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता और एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा भी की।
अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने बढ़ती भीड़ को शांत कराने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि जांच के पूरा होने तक अफवाहों पर ध्यान न दें। मामले को लेकर पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा और मॉर्ग प्रबंधन की प्रक्रिया पर नए सिरे से सवाल उठने लगे हैं। जांच रिपोर्ट आने तक अस्पताल ने मॉर्ग क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है।