पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी के 20 सांसदों ने बगावत कर दी है। इन सांसदों ने दलबदल कानून से बचने के लिए एनसीपीआई पार्टी का दामन थामा है। टीएमसी नेताओं ने इसे भाजपा की साजिश और बागी सांसदों का शर्मनाक कदम बताया है। किसने क्या कहा? जानिए...
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने एक बड़ा कदम उठाया है। इन सभी सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) में शामिल होने का फैसला किया है। बागी गुट ने इस विलय की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी दे दी है। टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने इस कदम की आलोचना की है। नेताओं का साफ कहना है कि यह केवल दलबदल कानून की कार्रवाई से बचने का एक रास्ता है।
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गुमनाम पार्टी का सहारा और कानूनी दांवपेच
टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने इस दलबदल पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का एक गुमनाम दल में जाना बेहद दुखद है। सौगत रॉय ने बताया कि एनसीपीआई बंगाल में सिर्फ रजिस्टर्ड पार्टी है। इस पार्टी ने अपने उम्मीदवार त्रिपुरा में उतारे थे। ऐसे दल के साथ विलय करने का कोई राजनीतिक मतलब नहीं है। बागी सांसदों ने अपनी इज्जत पूरी तरह खो दी है। सौगत रॉय के अनुसार, यह पूरा ड्रामा केवल दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए किया गया है।
जांच एजेंसियों पर सवाल और भाजपा पर निशाना
सौगत रॉय ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का भी बचाव किया। केंद्रीय एजेंसियां लगातार अभिषेक बनर्जी से पूछताछ कर रही हैं। इस पर सौगत रॉय ने कहा कि सीआईडी और ईडी की यह कार्रवाई पूरी तरह प्रतिशोध की राजनीति है। केंद्र सरकार विपक्ष को पूरी तरह खत्म करना चाहती है। यह पूरी तरह से भाजपा की कार्यशैली है। भाजपा विपक्षी नेताओं को चैन से काम नहीं करने देना चाहती।
'बागी सांसदों के लिए भाजपा ने अपने दरवाजे बंद कर दिए'
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने बागी सांसदों पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इन सांसदों के लिए असली सच बहुत कड़वा है। भाजपा ने इन बागी सांसदों के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिए हैं। ये सांसद लगातार भाजपा नेताओं के चक्कर काट रहे थे। इसके बावजूद भाजपा ने इन्हें सीधे अपनी पार्टी में शामिल नहीं किया। भाजपा ने इन्हें रहने के लिए एक 'किराए का मकान' यानी एनसीपीआई थमा दिया है।
कुणाल घोष ने दावा किया कि एनसीपीआई के अंदर इस विलय को लेकर कोई आधिकारिक बैठक नहीं हुई है। इन सांसदों को पार्टी का झंडा तक नहीं मिला है। इसके साथ ही घोष ने विधायक नैना बंदोपाध्याय के बारे में भी बात की। उन्होंने उम्मीद जताई कि नैना ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगी। नैना के पति सुदीप बंदोपाध्याय पार्टी बदलने में माहिर हैं और वे जा चुके हैं, लेकिन नैना अपनी कसम निभाएंगी।
संसद सत्र से पहले कानूनी लड़ाई की आहट
सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार इस बागी गुट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीएमसी के पास लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं, जिनमें से 20 सांसद टूट चुके हैं। यह संख्या दलबदल कानून से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई के आंकड़े को पूरा करती है। बागी गुट इसे जुलाई में शुरू होने वाले संसद सत्र से पहले एक सुरक्षित रास्ता मान रहा है। दूसरी तरफ, टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि कानून के मुताबिक मूल पार्टी का विलय होना जरूरी है। इस मामले पर अब लोकसभा अध्यक्ष के सामने बड़ी कानूनी जंग होना तय है।