सुप्रीम कोर्ट द्वारा गिरफ्तार करने के आदेश के बाद जस्टिस सीएस कर्णन ने मांग की है कि कोर्ट अपने फैसले को वापस लें। कर्णन के वकील ने कहा कि वो फिलहाल चेन्नई में हैं और देश छोड़कर नहीं गए हैं। हालांकि उनको गिरफ्तार करने के लिए कोलकाता पुलिस चेन्नई पहुंच गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सीएस कर्णन को छह महीने के लिए जेल भेजने के आदेश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वे आंध्र प्रदेश के उस स्टेट गेस्ट हाउस में मौजूद नहीं हैं, जहां से वे श्रीकालाहस्ती शहर के एक मंदिर में दर्शन के लिए जाने वाले थे। उनके साथ वहां पहुंचे दो वकील भी स्टेट गेस्ट हाउस में मौजूद नहीं हैं।
बताया जा रहा है कि करनन बिना किसी आधिकारिक सूचना के वहां से चल गए हैं और उनका बिल भुगतान भी अभी बाकी है। इससे पहले कहा जा रहा था कि मंगलवार को यहां पहुंचे कर्णन गुरुवार सुबह मंदिर दर्शन के लिए जाएंगे।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस ने डायरेक्टर जनरन को अरेस्ट करने के आदेश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने मीडिया को निर्देश दिए हैं कि वे कर्णन के विवादित बयानों को नजरअंदाज करें। जस्टिस कर्णन पर कोर्ट अवमानना का आरोप है।
इंडियन एक्स्प्रेस की खबर के मुताबिक उनके सहयोगी और कानूनी सलाहकार ने ये दावा किया है। उन्होंने कहा कि जब तक राष्ट्रपति उनसे मुलाकात नहीं करेंगे वे देश नहीं लौटेंगे।
इससे पहले कर्णन को गिरफ्तार करने के लिए कोलकाता पुलिस बुधवार को चेन्नई पहुंची। अवमानना के आरोप में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन को छह माह जेल की सजा सुनाई है। मंगलवार को आंध्र प्रदेश के पास श्रीकलाष्ठी में पहुंचने के बाद वह एक गेस्ट हाउस में रुके थे। फैसला आने के बाद उन्होंने अपने कमरे में मीडिया से बातचीत भी की।
इस पूरे विवाद से अनजान है जस्टिस कर्णन का गांव
जस्टिस सीएस कर्णन
- फोटो : File Photo
कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सीएस कर्णन भले ही राष्ट्रीय विवाद का केंद्र बन गए हैं और वह सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी मोल ले चुके हैं लेकिन उनके पैतृक गांव में इस मामले पर कोई चर्चा तक नहीं हो रही है। वृद्धाचलम के पास कर्णाथम पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष वी.आदिकेशवन बताते हैं, ‘यहां भी कुछ खबरें आई हैं और तभी हम जान पाए कि कुछ गड़बड़ है। लेकिन मुझे पूरी जानकारी नहीं है।’ दलित परिवार में जन्मे और हाई स्कूल के हेडमास्टर के बेटे जस्टिस कर्णन हाई स्कूल की शिक्षा तक इसी गांव में रहे। लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए पहले वृद्धाचलम और फिर चेन्नई चले गए।
जस्टिस कर्णन का घर अब भी कर्णाथम में मौजूद है लेकिन ग्रामीणों के बीच उनका नाम बहुत ज्यादा चर्चित नहीं है। हालांकि कुछ दलितों को जरूर गर्व है कि वह हाईकोर्ट के जज बन गए हैं। कर्णाथम आम गांवों की तरह नहीं है जहां दलित हिंदू की अन्य जातियों से अलग बस्तियों में रहते हैं। यहां करीब 500 परिवार हैं जिनमें से 40 प्रतिशत दलित हैं और ये सभी परिवार एक-दूसरे के पड़ोसी हैं। यहां लगे पानी के नल सभी समुदाय इस्तेमाल कर सकते हैं।
जस्टिस कर्णन अपने आठ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। कर्णाथम में ही रह रहे उनके 87 वर्षीय चाचा सी. काशीलिंगम ने बताया कि उनके बड़े भाई चिन्नास्वामी स्वामीनाथ सरकारी हाई स्कूल के हेडमास्टर थे और उस समय के दक्षिणी अरकोट जिले के शिक्षक संघ के अध्यक्ष भी थे। उनका निधन दो साल पहले ही हुआ है। उन्होंने बताया, ‘जज के पिता अनुशासनप्रिय व्यक्ति थे और उन्होंने अपनी आठों संतानों को अच्छी शिक्षा दी।’
गांव वालों से मेलजोल नहीं
कर्णन ने मंगलमपेटई हाई स्कूल से पढ़ाई की और वृद्धाचलम आर्ट्स कॉलेज से स्नातक किया। उनके दो भाई वकील हैं जबकि एक भाई तमिलनाडु स्पेशल पुलिस में हैं। गांववाले बताते हैं कि जस्टिस कर्णन सात महीने पहले ही गांव आए थे। वह गांव के लोगों से मिलते-जुलते नहीं थे। लेकिन अपने परिवार की कुलदेवी से उनका लगाव था। उन्होंने कर्णाथम में ही वैरावर देवी के लिए एक मंदिर बनाने की व्यवस्था की।
15 साल पहले अन्नाद्रमुक के बूथ एजेंट थे
तमिलनाडु में एक विनम्र दलित वकील से वह 2002 में एक राजनीतिक दल के बूथ एजेंट बन गए। इसके बाद उन्हें 2009 में एक शीर्ष संवैधानिक पद पर नियुक्त किया गया। जस्टिस कर्णन के जीवन में पिछले 15 साल के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए जिस पर किसी बॉलीवुड फिल्म की पटकथा बन सकती है। मद्रास हाईकोर्ट में उनके पूर्व सहयोगियों ने उनकी उत्पीड़न करने वाली मानसिकता का खुलासा किया है।
मार्च 2009 में मद्रास हाईकोर्ट के जज की शपथ लेने के तत्काल बाद ही उन्होंने हाईकोर्ट के जजों और एक के बाद एक कई मुख्य न्यायाधीशों पर गंभीर आरोप मढ़े। वह राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) तथा सुप्रीम कोर्ट आयोग को नियमित रूप से पत्र लिखकर आरोप लगाते रहे कि अन्य जज उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हैं। दो साल पहले ही उन्होंने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजय किशन कौल के खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाने की धमकी दी थी। मद्रास हाईकोर्ट की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन के आदेश पर रोक लगा दी थी। इस तरह के झंझटों से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट तत्कालीन सीजेआ