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कोलकाता: बंगाली अभिनेता को नाटक से निकाला, थिएटर ग्रुप ने कहा- भाजपा में शामिल होकर गलत किया

Fri, 12 Mar 2021 05:00 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
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बंगाली अभिनेता कौशिक कार - फोटो : सोशल मीडिया
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पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भाजपा का दामन थामना एक थिएटर कलाकार को भारी पड़ गया। दरअसल, बंगाल में सामाजिक-आर्थिक विषयों पर नाटकों के मंचन के लिए मशहूर एक थिएटर ग्रुप ने इस अभिनेता को नाटक से बाहर कर दिया। इस बारे में थिएटर ग्रुप के सौरभ पालोधी ने सोशल मीडिया पर भी जानकारी दी है।

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एफबी पर लिखा यह पोस्ट

सौरभ पालोधी ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किया कि कलाकार कौशिक कार को भाजपा में शामिल होने के कारण नाटक से हटा दिया गया है। पालोधी का नाटक 'घूम नेई' उत्पल दत्त के क्लासिक नाटक पर आधारित है, जिसमें वाम विचारधारा के चश्मे से देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को दर्शाया गया है। कौशिक कार को पालोधी के ग्रुप 'इच्छेमोतो' ने 2019 में एक किरदार निभाने के लिए बुलाया था। यह किरदार 2015 के दादरी मामले से प्रेरित था, जिसमें 'बीफ' खाने के संदेह में भीड़ ने पीट-पीटकर एक युवक की हत्या कर दी थी।

'भाजपा में शामिल होना गलत'

बता दें कि पालोधी वामपंथी विचारधारा के हैं। उन्होंने तीन दिन पहले फेसबुक पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि हम लोग कौशिक कार को 'घूम नेई' से तत्काल प्रभाव से हटा रहे हैं, क्योंकि वह भाजपा में शामिल हो गए हैं। इस वक्त उन्हें नाटक से हटाने का यह कारण पर्याप्त है। कामकाजी वर्ग के नाटक में सांप्रदायिक तत्वों के लिए कोई जगह नहीं हो सकती है।' थिएटर ग्रुप जल्द ही 'घूम नेई' के अगले शो की तारीख का एलान करेगा।

सोशल मीडिया पर आ रहीं प्रतिक्रियाएं

बता दें कि सौरभ पालोधी के इस पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। आरका रॉय ने कहा, 'क्या यह किसी कलाकार की आजादी का उदाहरण है? क्या यह लोकतांत्रिक अधिकार है? क्या एक कलाकार को वामपंथी या दक्षिणपंथी विचारधारा के आधार पर परखा जाना चाहिए...? कोई व्यक्ति किस राजनीतिक पार्टी में जाना चाहता है, यह उस पर छोड़ देना चाहिए। किसी को इसमें दखल देने का अधिकार नहीं है।' 

'नाटक के उलट है भाजपा की विचारधारा'

इस मामले में पालोधी ने कहा कि वह अपने फैसले पर अटल हैं, क्योंकि यह नाटक भाजपा की विचारधारा के उलट है। उस पार्टी से जुड़ा कोई व्यक्ति 'घूम नेई’ का हिस्सा नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि कौशिक कार की मौजूदा राजनीतिक पहचान को जानते हुए नाटक से उनका जुड़े रहना नाटक की मूल भावना तथा जिस कामकाजी वर्ग के लिए इसे बनाया गया है, उसके साथ अन्याय होगा। 
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अभिनेता ने कही यह बात

इस पूरे घटनाक्रम को बंगाली अभिनेता कौशिक कार ने 'वामपंथी फासीवाद की अभिव्यक्ति' बताया। उन्होंने कहा कि कोई अनुभवहीन व्यक्ति ही इस तरह का फैसला कर सकता है। ऐसे व्यक्ति का जनता से कोई जुड़ाव नहीं है। वह प्रगतिवादी सांस्कृतिक इतिहास को नहीं जानता है, फिर भी सांप्रदायिकता पर भाषण दे रहा है। मैं इस एकतरफा फैसले से हैरान हूं।
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