बर्थविलेज नाम के प्रसव केंद्र में नवजात की मौत के मामले पर सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट के जस्टिस देवन रामचंद्रन ने हैरानी जताते हुए कहा कि लोगों का व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ज्ञान के आधार पर जीना दुर्भाग्यपूर्ण है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस रामचंद्रन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, 2023 में केरल में दाई के काम की अवधारणा का मौजूद होना और लोगों का इसे इस्तेमाल करना बेहद चौंकाने वाला है। लोग व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के सहारे जी रहे हैं। यह कितना दुखद है। आखिर, अब भी यह संस्थाएं क्यों चल रही हैं।
जस्टिस रामचंद्रन ने हैरानी जताते हुए कहा कि लोग कहीं भी चले जाते हैं, लेकिन सुरक्षित और भरोसेमंद नियमित अस्पतालो में नहीं जाते हैं। प्रसव के सुरक्षित वैज्ञानिक, चिकित्सकीय और परखे गए तरीके मौजूद हैं, लेकिन लोग अप्रयुक्त, प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी वाली प्रथाओं को चुन रहे हैं। यह बात किसी व्यक्ति विशेष के बारे में नहीं है, बल्कि आम तौर पर नागरिकों के रवैये की बात है, जिसके लिए हम सभी जिम्मेदार हैं।
मामला गंभीर, तत्काल कार्रवाई करें अधिकारी
न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं के आरोप इतने गंभीर हैं कि सक्षम अधिकारियों को तत्काल ध्यान देना चाहिए। याचिकाकर्ताओं के वकील राघुल सुधीश ने अदालत को बताया कि कोचीन बर्थविलेज अभी भी संचालित हो रहा है और कई माताओं को अभी भी विज्ञापनों के जरिये फंसाया जा रहा है। अदालत ने स्थानीय अधिकारियों को मामले में पक्षकार के तौर पर शामिल करते हुए पूछा है कि बर्थविलेज के पास जरूरी लाइसेंस है या नहीं जांच कर सूचित करें।
यह था मामला
केरल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें प्रसव के लिए दाई मॉडल और प्रसव केंद्रों पर नियंत्रण के नियम बनाने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता दंपती ने अदालत को बताया कि कोचीन में बर्थविलेज नाम के प्रसव केंद्र में उनके बच्चे का जन्म हुआ और 2 दिन बाद उसकी मौत हो गई। याचिका में दंपती ने आरोप लगाया कि बर्थविलेज में उनका बच्चा चिकित्सकीय सुविधाओं की कमी और प्रशिक्षित चिकित्सक के अभाव में हुई। जबकि, उन्हें बताया गया था कि दाई के मॉडल के जरिये बच्चे का प्राकृतिक प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल की जाएगी, साथ ही जरूरत होने पर प्रशिक्षित चिकित्सक भी मौजूद रहेंगे। बच्चा पीलिया के साथ पैदा हुआ था, जिसके बाद उसे धूप दिखाने की बात कही गई, जबकि चिकित्सकीय मदद की जरूरत थी।