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जानें भारतीय भगोड़ों के लिए क्यों पसंदीदा देश है ब्रिटेन, नीरव-माल्या समेत कई ने ली है शरण

Sun, 17 Jun 2018 04:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारतीय भगोड़ों के लिए ब्रिटेन पसंदीदा देश बनता जा रहा है। चाहे देश के सरकारी बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाने वाले नीरव मोदी की बात करें या विजय माल्या की। इन सभी ने यहां पनाह ली हुई है। भारत सरकार ने नीरव मोदी को देश लाने के बहुत से प्रयास किए लेकिन अभी तक वह इसमें सफल नहीं हो पाई। आंकड़ों की माने तो पता चलता है कि भारत के अधिकतर भगोड़ों ने जिन देशों में पनाह ली है, उनमें ब्रिटेन पहले नंबर पर है। वहां केवल नीरव ही नहीं बल्कि विजय माल्या समेत और भी कई धोखेबाज रह रहे हैं। आप हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर ब्रिटेन में ऐसा क्या कि यह भगोड़ों के लिए पसंदीदा देश बनता जा रहा है....
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इन सबने ली है पनाह

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सरकार को जब पता चला कि पंजाब नेशनल बैंक को 13,500 करोड़ रुपये का चूना लगाने वाला नीरव मोदी हांगकांग में है तो इसके लिए चीनी सरकार से भी मदद मांगी गई लेकिन फिर भी वह नहीं पकड़ा गया। लेकिन अब वह ब्रिटेन में आराम से रह रहा है और उसने ब्रिटेन से राजनीतिक शरण भी मांगी है। नीरव से अलावा विजय माल्या, म्यूजिक डायरेक्टर नदीम शैफी, टाइगर हनीफ, संजीव चावला, रवि शंकरन, लॉर्ड सुधीर चौधरी, राजकुमार पटेल, राजेश कपूर, अब्दुल शाकूर जैसे लोगों ने भी यहां पनाह ली हुई थी। विजय माल्या और ललित मोदी तो आज भी यहां रह रहे हैं।
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इसलिए यहां पनाह लेना है आसान

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यहां पनाह लेना भगोड़ों बहुत आसान है। ब्रिटेन में ऐसा कोई भी व्यक्ति पनाह ले सकता है जो अपने देश में धर्म, नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता, मत या अन्य किसी भी वजह से खतरा महसूस करता हो। वह एक रिफ्यूजी के तौर पर वहां 5 साल तक रह सकता है। यदि 5 साल बाद भी उस व्यक्ति को लगता है कि उसके देश में हालात अच्छे नहीं हुए हैं तो वह इस अवधि को और भी बढ़वा सकता है।

आसान प्रक्रिया है ब्रिटेन में

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इसके लिए ब्रिटेन ने एक बेहद आसान प्रक्रिया भी रखी है। ब्रिटेन में रिफ्यूजी के तौर पर रहने के लिए महज माइग्रेंट डिपार्टमेंट में आवेदन करना होता है। इसे 6 महीने के भीतर ही स्वीकृति मिल जाती है। कई बार यदि कोई कानूनी दांवपेच हो तो एक साल का वक्त भी लग सकता है। लेकिन इस काम को और भी आसान बनाने के लिए अब फास्ट ट्रैक डिपार्टमेंट बनाया गया है। जिसमें सिर्फ 22 दिनों के भीतर ही प्रक्रिया शुरू हो जाती है। 
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इतने पैसे मिलते हैं रिफ्यूजी को

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ब्रिटेन में ठहरने वालों को एक फायदा यह भी होता है कि यहां की सरकार रिफ्यूजी के रहने का पूरा इंतजाम करती है। इसके अलावा उसकी आर्थिक मदद भी की जाती है। यदि अकेला व्यक्ति रिफ्यूजी के तौर पर जाता है तो उसे 3,364 रुपये हर हफ्ते दिए जाते हैं। जबकि सिंगल पेरेंट्स को 6,728 रुपये और  कपल को 13,365 रुपये मिलते हैं।
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मार्च 2018 में इतनों को मिला वीजा

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2018 मार्च में ब्रिटेन में 1.31 लाख लोगों का वीसा स्वीकृत हुआ था। इनमें भी सबसे ज्यादा संख्या भारतीय लोगों की है। 1.31 लाख लोगों में 45.89 हजार भारतीय हैं। जबकि रूस के 23.6 हजार और पाकिस्तान के 15 हजार लोग हैं। यानि कुल मिलाकर देखा जाए तो दुनिया के 24 देशों में भारत के 121 मोस्ट वांटेड लोग हैं। पिछले 5 सालों में 5500 भारतीय नागरिकों ने ब्रिटेन से राजनीतिक शरण भी मांगी है। 
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आरटीआई ने दिए आंकड़े

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भारत के 70 फीसदी यानि 83 भगोड़े ब्रिटेन, अमेरिका , यूएई और कनाडा में हैं। देश के 21 भगोड़े ऐसे हैं जो करीब 40 हजार रुपये लेकर भागे हैं। यह आंकड़े विदेश मंत्रालय में एक आरटीआई के जवाब में दिए गए हैं। अब भारत सरकार ने ब्रिटेन को प्रत्यर्पण के लिए 14 नामों की सूची दी है। 

भारत ने किए हैं दो समझौते

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भारत सरकार ने हाल ही में ब्रिटेन के साथ प्रत्यर्पण पर दो समझौते किए हैं। यदि यह अमल में आ जाता है तो करीब 75 हजार भारतीयों के प्रत्यर्पण की सुविदा मिलेगी। इनमें 60 बड़े नाम हैं जिनका प्रत्यर्पण भारत चाहता है। 

दुनिया के इन देशों में हैं भारतीय भगौड़े

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ब्रिटेन के अलावा दुनिया के अन्य देशों में भी भगोड़े पनाह लेकर बैठे हैं। जिसमें अमेरिका में 38, यूएई में 20, कनाडा में 13, ब्रिटेन में 12, जर्मनी में 05, सिंगापुर में 05, बांग्लादेश में 03, नेपाल में 03 और अन्य में 19 हैं।
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प्रत्यर्पण आवेदन को खारिज भी कर सकता है ब्रिटेन

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कुछ ऐसी शर्तें भी हैं जिनके आधार पर ब्रिटेन प्रत्यर्पण आवेदन खारिज कर सकता है। ब्रिटेन ने यूरोपियन कन्वेंशन ऑन ह्यूमन राइट्स (ईसीएचआर) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत यदि ब्रिटेन की अदालतों को ऐसा लगता है कि यदि किसी व्यक्ति को प्रत्यर्पित किया गया तो उसे प्रताड़ित किया जा सकता है या मौत की सजा दी जा सकती है तो वह ऐसे प्रत्यर्पण आवेदन को खारिज भी कर सकता है।
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