अप्रैल के तीसरे सप्ताह में भाजपा आलाकमान ने राजस्थान में नये प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा का मन बनाया था। भाजपा अध्यक्ष
अमित शाह संघ मुख्यालय नागपुर गए थे और इसके ठीक अगले दिन वसुंधरा राजे दिल्ली आईं थीं। सूत्र बताते हैं कि इस दौरान वह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और संगठन मंत्री रामलाल से मिली थीं।
वसुंधरा राजे ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव की स्थिति को देखते हुए चुनाव तक इस निर्णय को टाल देने का सुझाव दिया था। बताते हैं भाजपा आलाकमान ने इसे मान लिया था। दरअसल भाजपा जिस चेहरे को राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष का पदभार देना चाहती थी, वह वसुंधरा राजे को अखर रहा था।
वसुंधरा राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी को हटाने के पक्ष में भी नहीं थी, लेकिन संसदीय उपचुनाव के बाद बढ़े दबाव को उन्होंने स्वीकारते हुए अशोक परनामी को हटाने पर सहमति दे दी थी। सूत्र बताते हैं कि भाजपा का हाई कमान गजेन्द्र सिंह शेखावत को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पक्ष में था। जबकि वसुंधरा को यह प्रस्ताव मंजूर नहीं था।
वसुंधरा राजस्थान में भाजपा की नेता के तौर पर स्थापित हो चुकी हैं। वह राज्य में बड़ा जनाधार रखती हैं। मौजूदा समय में वह राजस्थान की राजनीति में अपनी आखिरी पारी नहीं खेलना चाहती। वसुंधरा को पता है कि भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष मन माफिक न होने पर कुछ महीने बाद होने वाले चुनाव में उन्हें कितनी राजनीतिक विसंगतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए वह फूंक-फूंककर कदम रख रही हैं।
दरअसल, केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री से 2003 में राजस्थान में भाजपा का चेहरा और राज्य की मुख्यमंत्री बनने वाली वसुंधरा ने राजनीति मां के दूध के साथ सीखी है। उनके स्वभाव में है कि वह आसानी से हार नहीं मानती हैं। वह डिप्लोमैटिक भी हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वसुंधरा ने राजस्थान में पूर्व उपराष्ट्रपति और भाजपा के दिग्गज नेता भैरो सिंह शेखावत से भाजपा का उत्तराधिकार लिया था।
तब जसवंत सिंह भी भाजपा में बड़ा कद रखते थे। बाद में पार्टी के दोनों बड़े चेहरे के विचार कई मामलों में वसुंधरा से मेल नहीं खाए, लेकिन वसुंधरा का कुछ नहीं बिगड़ा। वह राजस्थान भाजपा की राजनीति में अपनी जड़ें गहराती चली गई।
राजस्थान में आम तौर पर पांच साल में सत्ता बदल जाने का रिवाज सा है। एक बार कांग्रेस तो एक बार भाजपा। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह लोकसभा चुनाव 2019 से पहले हर राज्य में पार्टी की सफलता चाहते हैं। ताकि लोकसभा की राहें आसान बन पाए। राजस्थान भाजपा के नेताओं का एक धड़ा पहले राज्य में वसुंधरा को हटाने की मांग कर रहा था।
अब इस धड़े का फोकस अध्यक्ष के चेहरे पर है। इसके जवाब में वसुंधरा की रणनीति चुनाव करीब आने तक प्रदेश अध्यक्ष की तैनाती को टालने की है। इसके साथ-साथ वसुंधरा लगातार अपना दबाव बढ़ाने के लिए पूरे राज्य का दौरा करने में भी व्यस्त हैं। वह पिछले दो महीने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जा रही है।
सोमवार 28 मई से वह चार दिन के लिए मानगढ़, बांसवाड़ा के दौरे पर हैं। अगले महीने से उनकी योजना पूरे राज्य में विजय संकल्प यात्रा निकालने की है। भाजपा आलाकमान ने भी इसकी अनुमति दे दी है। इस यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के भी शामिल होने की संभावना है।