जम्मू और कश्मीर में पुलिसवालों के परिवार के अपहरण और रिहाई ने एक बार फिर से घाटी के रियाज अहमद नायकू को वापस सामने ला दिया। वह घाटी का सबसे वांछित आतंकी है। 30 साल का नायकू सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर 2016 में पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी की मौत के बाद आना शुरू हुआ था। उसके सिर पर 12 लाख रुपए का ईनाम है।
अवंतीपुरा के दुरबग के नायकू मोहल्ले का निवासी
नायकू घाटी के वांछनीय आतंकियों की A++ श्रेणी में आता है। उसने घाटी में पिछले साल सबजार भट की मौत के बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन के मुखिया का पद संभाला है। केंद्रीय सुरक्षा अधिकारी ने कहा, 'नायकू को पूरी घाटी में हिजबुल का कमांडर माना जाता है। पिछले एक साल के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने उसे कई बार घेरा है लेकिन हर बार वह किसी तरह बचकर भाग निकलने में सफल रहा।'
अधिकारी ने आगे कहा कि नायकू ने दृढ़ता से अपनी एक उसूलपरस्त आतंकवादी की छवि बनाई है। अधिकारी ने कहा, पिछले साल नायकू ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा था कि वह
कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी का स्वागत करेगा और दावा किया कि आंतकी पंडितों के दुश्मन नहीं हैं। नायकू के दो करीबी अल्ताफ काचरु और सद्दाम पेद्दार को सुरक्षा एजेंसियां मार चुकी हैं।
माना जाता है कि नायकू ने गन सैल्यूट को पुनर्जीवित किया, जिसे आतंकी अपने कमांडर की मौत पर देते हैं। अधिकारी ने कहा, 'मरे हुए आतंकियों के अंतिम संस्कार के दौरान उसे हवा में गोली चलाकर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए देखा गया है।' सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि अपनी छवि के कारण उसने दक्षिण कश्मीर के बहुत से युवाओं को आतंकी गुट में शामिल करने में सफलता प्राप्त की।
पुलिसवालों के बच्चों का अपहरण करने का सिलसिला उस समय शुरू हुआ जब नायकू के पिता को हिरासत में लिया गया। शुक्रवार शाम को जारी हुए ताजा ऑडियो संदेश में नायकू ने पुलिस को अपना खौफ दिखाते हुए उन्हें भारतीय एजेंट ना बनने के लिए कहा।