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साध्वी प्रज्ञा ठाकुर: मध्यप्रदेश के छोटे से गांव से लेकर मालेगांव ब्लास्ट तक, ऐसा रहा सफर

Thu, 28 Nov 2019 12:16 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रज्ञा सिंह ठाकुर (फाइल फोटो)
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संसद में महात्मा गांधी को गोली मारने वाले नाथूराम गोडसे को लेकर की गई टिप्पणी की वजह से भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर एक बार फिर चर्चा में हैं। वह मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से भारतीय जनता पार्टी की मौजूदा सांसद हैं। उन्होंने यहां 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह को हराकर जीत दर्ज की थी।
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बता दें कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मालेगांव ब्लास्ट केस में मुख्य आरोपी बनाए जाने के बाद सुर्खियों में आई थीं। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। हालांकि साध्वी प्रज्ञा मई 2016 से जमानत पर हैं। कुछ महीने पहले ही उन्हें प्रयागराज में हुए कुंभ में भारत भक्ति अखाड़े की आचार्य महांमडलेश्वर भी बनाया गया है। अब वे आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णचेतनानंद गिरी के नाम से भी जानी जाती हैं।

मध्यप्रदेश के भिंड जिले में जन्मीं

मध्यप्रदेश के भिंड जिले के कछवाहा गांव में दो फरवरी 1970 को साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का जन्म हुआ था। उन्होंने इतिहास विषय में परास्नातक की उपाधि हासिल की है। उनके पिता चंद्रपाल सिंह पेशे से आयुर्वेद के चिकित्सक थे और गांव में ही अपना क्लीनिक चलाते थे, जो संघ से जुड़े थे। प्रज्ञा बचपन से ही अच्छी भाषा शैली में भाषण दिया करती थीं।

यही वजह रही कि वह राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गईं। परिषद से जुड़ने के बाद शुरुआती दिनों में वह इंदौर, भोपाल, देवास और जबलपुर में होने वाले कार्यक्रम में भाग लेने जाती थीं। इन कार्यक्रमों में वह अपने भाषण से लोगों को लंबे समय तक बांधे रखती थीं।

विद्यार्थी परिषद छोड़ बनीं साध्वी

कुछ वर्षों बाद वह विद्यार्थी परिषद छोड़कर साध्वी बन गईं। इस दौरान वह कई संतों और साधुओं के संपर्क में आईं और प्रवचन करने लगीं। इसके साथ ही वह मध्यप्रदेश को छोड़कर वे गुजरात के सूरत में आश्रम बनाकर रहने और काम करने लगीं। प्रज्ञा गांवों में जाकर हिंदुत्व का प्रचार-प्रसार करतीं।

साथ ही कांग्रेस पार्टी और उसकी सरकार की जमकर आलोचना भी करती थीं। भाजपा का युवा मोर्चा साध्वी के कार्यक्रम करवाता। इसके बाद साल 2007 में प्रज्ञा को राष्ट्रीय स्वंय संघ के प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में आरोपी भी बनाया गया। साल 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में उन्हें गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद वह करीब नौ वर्ष तक जेल में रहीं। 
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क्या था मालेगांव ब्लास्ट मामला

महाराष्ट्र के मालेगांव में अंजुमन चौक और भीकू चौक के बीच शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट के सामने 29 सितंबर 2008 की रात करीब 9.35 बजे बम धमाका हुआ था, जिसमें छह लोग मारे गए और 101 लोग घायल हुए थे। इस धमाके में एक मोटरसाइकिल इस्तेमाल की गई थी। एनआईए की रिपोर्ट के अनुसार यह बाइक प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर थी।

इस मामले में एनआईए कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर को जमानत तो दे दी थी लेकिन उन्हें दोषमुक्त नहीं माना था। वहीं दिसंबर 2017 में दिए अपने आदेश में कोर्ट ने कहा था कि प्रज्ञा पर यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत केस चलता रहेगा। बता दें कि प्रज्ञा ठाकुर पर समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले के अभियुक्त सुनील जोशी की हत्या का भी आरोप लगा था। जोशी की 29 दिसंबर 2007 को हत्या कर दी गई थी।

अजमेर दरगाह ब्लास्ट मामले में भी साध्वी प्रज्ञा का नाम आया था, लेकिन अप्रैल 2017 में एनआईए ने प्रज्ञा ठाकुर, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार और दो अन्य के खिलाफ राजस्थान की स्पेशल कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।

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