प्रशांत महासागर के तापमान का असर सीधा भारत के मानसून पर पड़ता है। अगर प्रशांत महासागर की सतह का तापमान बढ़ने लगता है तो नमी भी बढ़ती है। जिस कारण प्रशांत महासागर में अधिक बारिश होती है। जिसका सीधा असर भारत के मानसून पर पड़ता है और यहां कम बारिश होती है। वहीं अगर प्रशांत महासागर का तापमान कम होता है तो वहां नमी भी कम हो जाती है। जिस कारण वहां कम बारिश होती है और भारत का मानसून अच्छा रहता है।
ये अनुमान बताते हैं कि भारत में कैसा होगा मानसून
भारत में मानसून की जानकारी इन अनुमानों द्वारा तय की जाती है। इसमें दिसंबर-जनवरी के बीच उत्तरी अटलांटिक और उत्तरी प्रशांत महासागर के तापमान में अंतर का अनुमान लगाया जाता है। इसके बाद फरवरी में दक्षिण भारतीय समुद्री सतह के तापमान की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। फिर फरवरी-मार्च के दौरान पूर्वी एशिया के समुद्र में दबाव की स्थिति का अनुमान लगता है। इसके बाद जनवरी में उत्तर-पूर्वी यूरोप की जमीनी सतह का अनुमान लगाया जाता है। इसके अलावा फरवरी-मार्च के दौरान भूमध्यरेखा पर प्रशांत महासागर के तापमान की स्थिति का पता लगाया जाता है।
उल्लेखनीय है कि मौसम विभाग ने लगातार तीसरे साल सामान्य मानसून का अनुमान जारी किया है। इस पर विभाग के डायरेक्टर जनरल केजे रमेश ने बताया कि प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान 2-3 डिग्री सेल्सियस कम रहने की आशा है, जिस कारण ला-नीनो बनेगा और यह भारत में मानसून के लिए उपयोगी साबित होगा।