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जानिए... नये दौर के यूलिप में नया क्या है?

Mon, 21 Jan 2019 06:44 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भौतिक परिसंपत्तियों जैसे सोना और रियल एस्टेट से कम रिटर्न मिलने और बैंक की गिरती जमा दरों के चलते, पिछले कुछ वर्षों में भारत में बचत की प्रवृत्ति में भारी बदलाव आया है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में इक्विटी परिसंपत्ति वर्ग ने जबरदस्त रिटर्न दिया है और इक्विटी आधारित निवेश उत्पादों में रिकॉर्ड निवेश हुआ है। सरकार के कदमों से देश की आर्थिक विकास एवं कारपोरेट आय वृद्धि के तेज होने का अनुमान है, और यह इक्विटी के लिए अच्छे संकेत हैं। वैसे भी इक्विटी दीर्घकालिक रूप से एकसमान बनी रही है।

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यूलिप दमदार निवेश उपकरण

मेरा मानना है कि यूलिप्स दमदार निवेश उपकरण है। यह ग्राहकों को व्यवस्थित एवं अनुशासित तरीके से इक्विटी बाजार में निवेश करने और दीर्घकालिक रूप से निवेश करने में मदद करता है। नये दौर के यूलिप, अपने पूर्ववर्ती रूपों के बेहतर एवं उन्नत संस्करण हैं और ये किफायती भी हैं। ये भारतीय खुदरा निवेशकों को आदर्श, वैल्यू-पैक्ड निवेश समाधान उपलब्ध कराते हैं।

नये दौर के यूलिप को परिभाषित करती लागत संरचना

पिछले कुछ वर्षों में, विनियामकों एवं जीवन बीमा उद्योग ने यूलिप को विकसित होने में मदद की है, ताकि ग्राहकों को अधिक मूल्य एवं लाभ प्रदान किया जा सके। ग्राहकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण हस्तक्षेप चाज को लेकर किया गया है। यूलिप के अधिकतम चार्ज को न केवल वर्ष-दर-वर्ष आधार पर नियंत्रित किया गया है, बल्कि 10 वर्षों की पॉलिसी अवधि के लिए एक वर्ष का संयुक्त चार्ज 2.25 फीसदी से अधिक हो ही नहीं सकता है। आज, कई जीवन बीमा कंपनियों के भी आवंटन चार्ज वास्तव में कम है या उनके द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे आधुनिक यूलिप में इन्हें पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।
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प्रबंधन शुल्क

ग्राहकों को यह भी देखने को मिलेगा कि निधि प्रबंधन शुल्क फंड मैनेजमेंट चार्ज/एफएमसी- अब 1.35 फीसदी से अधिक नहीं होगा। दरअसल, कई यूलिप्स का फंड मैनेजमेंट चार्ज काफी कम है। कुछ इक्विटी-आधारित यूलिप का एफएमसी 1.25 फीसदी है, अनेक डेब्ट-आधारित यूलिप के चार्ज न्यूनतम 0.95 फीसदी है। यहां तक कि सरेंडर चार्ज में भी बदलाव किया गया है। यदि कोई ग्राहक यूलिप को सरेंडर करने का निर्णय लेता है, तो कोई भी चार्ज नहीं लगेगा, बशर्ते पॉलिसी के पांच वर्ष पूरे हो चुके हों। ग्राहक जब चाहें तब अपना निवेश निकाल सकते हैं। यदि पॉलिसी के पांच वर्ष पूरे नहीं हुए हों, तो सरेंडर चार्ज की कटौती के बाद ग्राहक का फंड वैल्यू निर्दिष्ट डेट फंड में अंतरित कर दिया जायेगा। सरेंडर की जा रही पॉलिसी के अनिवार्य 5-वर्ष की लॉक-इन अवधि के बाद, ग्राहक को पैसा चुका दिया जाएगा।

ऑनलाइन उपलब्धता

यूलिप की ऑनलाइन उपलब्धता एवं उनकी बढ़ती लोकप्रियता भविष्य में आने वाली चीजों का संकेत है। जीवन बीमा कंपनियां अपने उत्पादों को वहां उपलब्ध करा रही हैं, जहां से आधुनिक दौर के निवेशकों को उन्हें खरीदने में सुविधा होती है। आगे उन्हें बेहतर खरीदारी अनुभव प्रदान करने हेतु, जीवन बीमाकर्ता कई आसानी से उपयोग किये जा सकने वाले ऑनलाइन कैल्कुलेटर्स उपलब्ध कराती हैं, ताकि ग्राहकों को उनकी निवेश आवश्यकताओं को समझने में मदद मिल सके। इसके साथ ही, महज कुछ क्लिक्स में ग्राहक चार्ज, लाभ तथा अन्य चीजें देख सकते हैं।

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लॉक-इन अवधि से वित्तीय अनुशासन आता है

यूलिप की अनिवार्य लॉक-इन अवधि पांच वर्षों की होती हैं, जहां ग्राहक अपने प्रीमियम का भुगतान मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर कर सकते हैं। इससे ग्राहक के लिए दो चीजें होती हैं। एक तो यह कि ये प्रीमियम भुगतान समय के अनुसार स्वत: थोड़ा वित्तीय अनुशासन लाता है। दूसरा, यह स्वत: ही ग्राहकों को दीर्घकालिक बाजार गतिविधि का लाभ उठाने में मदद करता है। लॉक-इन अवधि के चलते, ग्राहकों को बेहतर फंड प्रदर्शन प्राप्त होता है।

लोकप्रिय निवेश उत्पादों को मात देने वाला फंड प्रदर्शन

वर्षों से यूलिप के प्रदर्शन का ट्रैक रिकॉर्ड उत्पाद द्वारा उपलब्ध कराये जाने वाले दमदार प्रस्ताव का सबूत है। बड़ी पूंजीकरण वाले इक्विटी यूलिप्स का औसत श्रेणीवार रिटर्न लगभग 15 फीसदी सीएजीआर रहा है और मझोली व छोटी पूंजीकरण वाले यूलिप ने लगभग 24 फीसदी सीएजीआर का औसत श्रेणीवार रिटर्न प्रदान किया है।

कर लाभ

जब ग्राहक यूलिप में निवेश करते हैं, तो उन्हें अपने पोर्टफोलियो को पुनर्संतुलित करने का लाभ भी मिलता है। इसका अर्थ यह है कि यदि ग्राहक इक्विटी से डेट फंड या डेट फंड से इक्विटी में जाना चाहे, तो वो अपनी इच्छानुसार इसे आसानी से कर सकता है। एक फंड से दूसरे फंड में जाने की इस सुविधा के लिए कोई शुल्क नहीं है।

यूलिप को हमेशा आयकर कानून की धारा 10 -10डी- और धारा 80सी के तहत कर से छूट रहा है। चूंकि यह पांच वर्ष की लॉक-इन अवधि वाला दीर्घकालिक निवेश है, इसे ध्यान में रखते हुए, नई कर संरचना लाई जाने के बाद से वे और अधिक आकर्षक हो चुकी हैं।

(तरूण चुघ, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस)
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