भारत में इस बात को लेकर कोई शंका नहीं है कि पाकिस्तान ने एफ-16 का ही इस्तेमाल किया। 80 के दशक में जब अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ-16 दिए थे। उसी वक्त भारत ने मिराज-2000 को लेकर फ्रांस से सौदा किया था।
भारतीय वायु सेना के वाइस मार्शल आरजीएम कपूर ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने जम्मू के ब्रिगेड और बटालियन मुख्यालय को निशाना बनाने की कोशिश की थी। साथ ही प्रेस कांफ्रेंस में राजौरी के पूर्वी इलाके में मिले 'एमराम' मिसाइल के टुकड़े दिखाते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल सिर्फ एफ-16 में ही किया जा सकता है। भारतीय वायु सेना के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें एएआरएएम मिसाइल के पार्ट भी एलओसी में मिले हैं, जिसे पाकिस्तानी एफ-16 लड़ाकू विमान ने दागा था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अब पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका बड़ी कार्रवाई कर सकता है। पाकिस्तान को 80 के दशक में जो विमान दिए गए तो अमेरिका ने शर्त रखी थी। प्रेसलर संशोधन के बाद अमेरिका ने एफ-16 की बिक्री बंद कर दी थी। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान तब परमाणु परीक्षण कर चुका था।
प्रेसलर संशोधन के मुताबिक, उस देश को एफ-16 लड़ाकू विमान नहीं दिए जा सकते हैं जिसने परमाणु परीक्षण किया हो। इस संशोधन और परमाणु परीक्षण के बाद भी पाकिस्तान ने अमेरिका को एफ-16 का ऑर्डर दिया था। लेकिन इस समझौते के कारण अमेरिका इनकी सप्लाई नहीं कर पा रहा था।
इस संशोधन के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को नए लड़ाकू विमान दे दिए क्योंकि अफगानिस्तान में अमेरिका के आने के बाद हालात बदल गए थे। इसकी शर्त थी कि पाकिस्तान इनका इस्तेमाल केवल आतंक के खिलाफ ही करेगा। माना जा रहा है कि पाकिस्तान को दूसरी खेप देते समय पुराने विमानों पर भी यही शर्त रखी गई।
पाकिस्तान को पड़ सकता है भारी
पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अमेरिका दी जा रही वित्तीय मदद को रोक सकता है। इसके साथ ही वह आर्थिक दबाव भी डाल सकता है, जिससे पाकिस्तान मुश्किल में पड़ सकता है। इसके अलावा वह अन्य देशों और संगठनों के माध्यम से होने वाली फंडिंग को भी रोक सकता है। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि ये सब तभी हो पाएगा जब ये साबित होगा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ जिस एफ-16 का इस्तेमाल किया है, उसपर वो शर्त लागू होती है या नहीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एयर मार्शल चोपड़ा का कहना है कि पाकिस्तान को दी गई एफ-16 की पहली खेप पर कोई शर्त ना लगाने की वजह यह हो सकती है कि उस वक्त वार ऑन टेरर नहीं था। इसकी शुरुआत बाद में हुई थी। जिस कारण दूसरी खेप में यह शर्त लगाई गई थी।
भारत के पास पाकिस्तान के खिलाफ पुख्ता सबूत
जिस मिसाइल को भारत ने सुबूत के तौर पर दिखाया है वह एमरॉम मिसाइल है, जो 80 के दशक के दौरान नहीं थी। वाइस मार्शल ने एफ-16 के अलावा पाकिस्तानी हमलावर टुकड़ी में जेएफ-17 और मिराज विमानों के भी शामिल होने की बात कही। साथ ही कहा कि विमान के इलेक्ट्रानिक सिग्नेचर से भी साबित होता है कि उस हमले में एफ-16 का इस्तेमाल किया गया।
अमेरिका पहले ही एफ-16 को अपग्रेड करने से अपने हाथ खींच चुका है। पाकिस्तान ने इन्हें तुर्की से अपग्रेड करवाया है। इसके अलावा इस विमान में लगने वाले सभी पुर्जे भी अमेरिकी हैं। अमेरिका विमान से जुड़ी हर सप्लाई पर रोक लगा सकता है। इससे पाकिस्तान को ये नुकसान होगा कि उसकी एफ-16 की स्क्वाड्रन जमीन पर आ जाएगी।