टैंक की सवारी करते हुए पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद नरेंद्र मोदी, हर साल सैनिकों के साथ दीवाली मनाते हैं। वे भारतीय सेना के अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के बीच भी जाते रहे हैं। पीएम मोदी जब जवानों के बीच होते हैं तो वे उनके जैसी कॉम्बेट यानी 'युद्ध' ड्रेस पहनते हैं। जैसे इस दीवाली पर वे राजस्थान के लोंगेवाला बॉर्डर की एक चौकी पर पहुंचे थे।
अमेरिकन राष्ट्रपति भी समय-समय पर अफगानिस्तान और इराक में मौजूद अपने सैनिकों का हौसला बढ़ाने के लिए उनके बीच जाते रहे हैं। वहां भी राष्ट्रपति, सेना वाली पोशाक पहनते हैं। पीएम मोदी, जब बॉर्डर पर जाते हैं तो उनकी ड्रेस में उस इलाके का एक रंग भी जरुरत रहता है। इस ड्रेस को कैमॉफ्लाज या छलावरण भी कहा जाता है। यही वो ड्रेस होती है, जिसे देखकर हमारे सैनिकों का उत्साह दोगुना हो जाता है और दुश्मन देशों के हुक्मरानों की नींद उड़ने लगती है।
सुरक्षा एवं राजनीतिक विश्लेषक ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) बताते हैं कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री के अलावा कानूनी तौर पर उस ड्रेस को पहनने का जो हकदार है, यानी जवान व अफसर, उनके अलावा अन्य कोई भी व्यक्ति उसे नहीं पहन सकता। इस ड्रेस को लेकर जिला मैजिस्ट्रेट को एक निर्देश दिया गया है। उसमें कहा गया है, जिला मजिस्ट्रेट सुनिश्चित करेंगे कि उनके इलाके में कोई भी व्यक्ति सेना के रंग वाली ड्रेस का कपड़ा तो नहीं बेच रहा है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने का प्रावधान है। पीएम जो 'युद्ध' ड्रेस पहनते हैं, उस पर केवल उनका नाम लिखा होता है। इसके अलावा इस ड्रेस पर कोई स्टार या चिन्ह आदि नहीं लगे होते। यदि पीएम हैट या टोपी डालते हैं तो उस पर बल या सेना का प्रतीक चिन्ह लगा रहता है।
अनिल गुप्ता के मुताबिक, चूंकि वह फॉरवर्ड एरिया होता है, इसलिए पीएम 'युद्ध' ड्रेस पहनते हैं। उनकी ड्रेस में उस इलाके का एक रंग जरूर होता है। संबंधित फोर्स की ड्रेस में भी वही रंग रहता है। सामान्यता ड्रेस में तीन रंग होते हैं। मिट्टी रंग, खाकी और हरा, इन्हीं तीन रंगों से ड्रेस बनती है। जो उस इलाके का प्रमुख रंग होता है, ड्रेस में उसे ज्यादा जगह मिलती है। युद्ध ड्रेस पर कोई रैंक अंकित नहीं होता। पीएम जब इस ड्रेस को पहनकर जवानों के बीच पहुंचते हैं तो उनका जोश दोगुना हो जाता है।