बाद में कहा - आदेश पर रोक लगाएं
दंगों के बाद दाखिल रिव्यू पिटीशन पर बहस करते हुए अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में जितने भी तर्क दिए, वे सभी एडिशनल सोलिसीटर जनरल मनिंदर सिंह द्वारा दिए तर्कों के एकदम विपरीत थे। वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार एससीएसटी एक्ट के मामलों में अग्रिम जमानत दिए जाने के सख्त खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के चलते पूरे देश में इमरजेंसी जैसे हालात हैं। हजारों लोग सड़क पर हैं। लिहाजा, इस आदेश पर फिलहाल रोक लगाई जाए। शोषित वर्ग के साथ बहुत अत्याचार होता है। कोर्ट ने जो सात दिनों का वक्त रखा है उस दौरान पीड़ित को डराया-धमकाया जा सकता है। इसलिए गिरफ्तारी से पहले जांच की जरूरत नहीं है।
केंद्र पक्षकार नहीं : गृहमंत्री
तीन अप्रैल को शून्यकाल में केंद्रीय गृहमंत्री
राजनाथ सिंह ने लोकसभा में बयान दिया कि सरकार इस कानून को कतई कमजोर नहीं करना चाहती है। वह तो इसे और मजबूत करने के पक्ष में है। लेकिन चूंकि सरकार उस केस में पक्षकार नहीं थी जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को फैसला सुनाया है, इसलिए वह कुछ भी कर पाने में असमर्थ थी। कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने भी बाद में कहा कि सरकार को औपचारिक रूप से पक्षकार नहीं बनाया गया।
केंद्र का पक्ष एएसजी ने रखा था
लेकिन हकीकत यह है कि सुभाष काशीनाथ महाजन बनाम महाराष्ट्र सरकार (जिसका फैसला 20 मार्च को सुनाया गया) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बाकायदा नोटिस जारी कर इस मामले पर उसका पक्ष जानना चाहा था। एडिशनल सोलिसीटर जनरल मनिंदर सिंह ने केंद्र सरकार की ओर स्थिति स्पष्ट की और कानून को लचीला बनाने की सिफारिश की।