क्या होती है शत्रु संपत्ति
बंटवारे के दौरान देश छोड़ कर गए लोगों की संपत्ति सहित, 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद भारत सरकार ने इन देशों के नागरिकों की संपत्तियों को सीज कर दिया था। इन्हीं संपत्तियों को शत्रु संपत्ति करार दिया गया है।
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इन संपत्तियों में भूमि, मकान, फार्म, शेयर, बैंक बैलेंस, प्रोविडेंट फंड समेत कई अचल और चल चीजें शामिल हैं। फिलहाल इन संपत्तियों की देखरेख की जिम्मेदारी कस्टोडियन ऑफ एनमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया के पास है। युद्ध के दौर में चीन और पाक छोड़ने वाले भारतीयों की संपत्ति की सुरक्षा करने में असफल रहने के बाद भारत सरकार ने यह कदम उठाया था।
शत्रु संपत्ति कानून संशोधन विधेयक में 2017 में किया गया बदलाव
पिछले वर्ष संसद में शत्रु संपत्ति कानून संशोधन विधेयक 2017 पारित होने के बाद शत्रु संपत्ति पर अपने मालिकाना हक की कानूनी लड़ाई लड़ने वालों को काफी निराशा हुई है। वहीं सरकार ने कानून में संशोधन के बाद से ही केंद्र सरकार ने एनेमी प्रॉपर्टी (शत्रु संपत्तियों) को बेचने की कवायद तक शुरू कर दी। इसके तहत सरकार ने अपने खजाने में तकरीबन एक लाख करोड़ रुपए की वृद्धि करने का भी लक्ष्य रखा है।