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पश्चिम बंगाल में 'कट मनी' पर बवाल, जानिए इसके बारे में सबकुछ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Wed, 03 Jul 2019 07:40 PM IST
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : PTI

पश्चिम बंगाल के ताजा 'कट मनी' विवाद ने भ्र्ष्टाचार को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है। कट मनी के इस मामले ने भ्रष्टाचार को लेकर सार्वजनिक स्वीकार्यता का भी एक अलग ही उदाहरण पेश किया है। पश्चिम बंगाल का यह 'कट मनी' का मामला भ्रष्टाचार के उस घिनौने स्वरूप की परतें उघाड़ता है जो व्यवस्था में घुन की तरह मौजूद नहीं है, बल्कि समूची व्यवस्था ही ऐसी हो गई है|



पश्चिम बंगाल के मंत्रियों, विधायकों और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने के बदले लोगों से 'कट मनी' वसूलने के आरोप लग रहे हैं। इसके अलावा किसी भी तरह की सरकारी मंजूरी देने के लिए भी 'कट मनी' वसूली जाती है। हो सकता है 'कट मनी' शब्द आपके लिए नया हो लेकिन आप इसे रिश्वत, घूस और मिठाई जैसे शब्दों के रूप में जानते हैं।


सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से 'कट मनी' (कमीशन) लिए जाने को लेकर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। मामला सामने आने के बाद अब पता चला कि कट मनी के लिए एक सूची भी बनी हुई है। इसकी शुरुआत 200 रुपये से होती है और ये 25 हजार रुपये तक है।


राज्य सरकार की समाबयाथी योजना के तहत अंतिम संस्कार और उससे जुड़े अन्य कामों के लिए दो हजार रुपये तक की मदद पहुंचाई जाती है। इसमें भी कट मनी के तौर पर लोगों से 200 रुपये तक लिए जाते हैं। 

क्या है 'कट मनी'?

कट मनी एक तरह का कमीशन होता है, जो स्थानीय सरकारी परियोजनाओं या कल्याणकारी योजनाओं के लिए स्वीकृत धनराशि में से लाभार्थी को देते समय काट लेते हैं। इसके इलावा टीएमसी नेताओं पर किसी सरकारी मंजूरी देने के एवज में भी 'कट मनी' लेने के आरोप लगे हैं।

ये क्या आधिकारिक है?

आयकर विभाग की नजरों से बचने के लिए कट मनी को आमतौर पर नकद लिया जाता है। कई बड़ी परियोजनाओं की लागत बहुत ज्यादा होती है, इसलिए इनकी 'कट मनी' भी करोड़ों में होती है। हाल ही में टीएमसी के बूथ अध्यक्ष त्रिलोचन मुखर्जी ने 2.25 लाख रुपये से अधिक की धनराशि लौटा दी, जो कि 141 मजदूरों से उनकी आठ दिन की मजदूरी से ली गई थी। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की पिछले साल जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया था कि भार में रिश्वत 11 फीसद बढ़ी है। इसमें पंजाब, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सरकारी अधिकारी सबसे भ्रष्ट बताए गए थे।

आजीवन कारावास की सजा

मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से 'कट मनी' स्वीकार करने वाले निर्वाचित जन प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों को अब एक कड़े कानून के तहत आरोपी बनाया जाएगा, जिसमें दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास का प्रावधान है।


 

इससे पहले राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 18 जून को तृणमूल पार्षदों की एक बैठक को संबोधित करते हुए आदेश दिया था कि वे लाभार्थियों से ली गई 'कट मनी' का कमीशन वापस करें। उन्होंने तब कहा था, 'मैं अपनी पार्टी में चोरों को नहीं रखना चाहती। यदि मैं कार्रवाई करूंगी तो वे किसी और पार्टी में शामिल हो जाएंगे। कुछ नेता गरीबों को आवास अनुदान मुहैया कराने के लिए 25 फीसदी कमीशन मांग रहे हैं। यह तत्काल रुकना चाहिए। पैसा तत्काल लौटा दीजिए।'

सिलीगुड़ी में हंगामा

सिलीगुड़ी घोगोमाली इलाके में भी कट मनी को लेकर स्थानीय व्यापारियों ने अनिश्चित समय के लिए अपनी दुकाने बंद कर दी हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पार्षद ने इनसे रिश्वत (कट मनी) मांगी है। केवल इतना ही नहीं विरोध कर रहे इन स्थानीय व्यापारियों ने सड़कों को जाम कर लिया है और टायर जलाए हैं। इस इलाके के अलावा राज्य में और भी कई जगह कट मनी को लेकर प्रदर्शन जारी हैं। बताया जा रहा है कि कट मनी का ये अवैध काम सालों से चल रहा था।

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