नामांकन दाखिल करने के बाद ही राहुल गांधी का कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना तय हो गया था, क्योंकि तय समय तक किसी और ने उनके सामने चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं जताई थी।
नामांकन से लेकर चुनाव तक राहुल गांधी के लिए सबकुछ बिना किसी बाधा के मिलना तय था लेकिन पार्टी में हमेशा ऐसी स्थिति नहीं रही। देश की 132 साल पुरानी पार्टी में कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में तमाम ऐसे मौके आए जिसने देश की राजनीति की धारा और दिशा दोनों को प्रभावित किया।
एक दौर ऐसा भी आया जब कांग्रेस के सबसे बड़े नेता रहे महात्मा गांधी को भी नैतिक रूप से हार का सामना करना पड़ा, तो सबसे ज्यादा लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वालीं वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी पार्टी में चुनौती का सामना करना पड़ा। आइए डालते हैं कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों पर।
नेहरू परिवार के पांच सदस्य रह चुके हैं कांग्रेस अध्यक्ष
- फोटो : AFP
- कांग्रेस पार्टी की स्थापना एक अंग्रेज ए ओ ह्यूम ने दो भारतीयों दादा भाई नारौजी और दिनशा वाचा के साथ मिलकर की थी। 28 दिसम्बर 1885 को बांबे के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में 72 प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कांग्रेस की स्थापना हुई थी। शुरूआत में इसे कुलीन लोगों का समूह माना गया था।
- महात्मा गांधी के आने के बाद यह स्वतंत्रता संग्राम का मंच बन गया। जिससे देश की आजादी की लड़ाई को धार दी गई। गांधी ने ही इसे आम भारतीय की पार्टी बनाया। साल 1924 में वह इसके अध्यक्ष भी बने
- राहुल गांधी, गांधी-नेहरू परिवार के छठे सदस्य होंगे जो कांग्रेस अध्यक्ष बनेंगे। उनसे पहले मोतीलाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी अध्यक्ष बन चुके हैं।
- सबसे ज्यादा बार और सबसे लंबे समय तक कांग्रेस अध्यक्ष रहने का रिकार्ड भी नेहरू-गांधी परिवार के नाम है। जवाहर लाल नेहरू सबसे अधिक छह बार और सोनिया गांधी सबसे लंबे समय तक 19 साल कांग्रेस अध्यक्ष रहीं।
- चार विदेशी मूल के व्यक्ति भी कांग्रेस के अध्यक्ष बने। जिन्हें भारत की आजादी से पहले यह जिम्मेदारी मिली, उनमें जार्ज यूले, वियिमन वेडरबर्न, अलफ्रेड वेब, हेनरी कॉटन और ऐनी बेसेंट शामिल हैं।
- कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाले कई नेता देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे हैं। जिनमें जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री और राजेन्द्र प्रसाद, नीलम संजीव रेड्डी और शंकर दयाल शर्मा राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे।
- के कामराज और सोनिया गांधी दोनों ऐसे नेता रहे जिनके सामने अध्यक्ष रहते प्रधानमंत्री बनने का मौका था लेकिन दोनों ने ही यह पद ठुकराकर संगठन को तवज्जो दी।
- कांग्रेस में अध्यक्ष पद का सबसे चर्चित चुनाव साल 1939 का रहा, जिसमें सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ महात्मा गांधी ने डा. पट्टाभि सीतारमैया को चुनाव लड़ाया।
- गांधी बोस के पिछले कार्यकाल से खुश नहीं थे इसलिए उन्होंने सुभाष के सामने सीतारमैया को यह कहते हुए खड़ा किया कि उनकी हार मेरी हार होगी। चुनाव हुआ और सीतारमैया को हार मिली। बोस को 1580 और सीतारमैय्या को 1377 वोट मिले। गांधी के खुले विरोध से आहत बोस ने बाद में इस्तीफा दे दिया और पार्टी भी छोड़ दी।
- इंदिरा गांधी को अपने पिता के प्रधानमंत्री रहते कांग्रेस की कमान मिल गई थी। वह 1959 को कांग्रेस अध्यक्ष बनीं उस समय उनके पिता जवाहर लाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। हालांकि अगले साल इंदिरा ने यह पद छोड़ दिया और नीलम संजीव रेड्डी नए अध्यक्ष चुने गए।
- जवाहर लाल नेहरू के साथ ही इंदिरा गांधी और राजीव गांधी प्रधानमंत्री पद पर रहते-रहते कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे हैं।