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माधव दवे की अंतिम इच्छा, मेरी मौत के बाद दिखावा न करें बल्कि पेड़ लगाएं

Thu, 18 May 2017 03:16 PM IST
amarujala.com- Presented by: मनीष कुमार
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अनिल माधव दवे
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मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री अनिल माधव दवे का गुरुवार सुबह दिल्ली में निधन हो गया। दवे के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी ने दुख जताते हुए इसे निजी हानि बताया है। दवे को उनकी रणनीति और दूरदर्शिता के लिए जाना जाता था। मध्यप्रदेश में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में उनकी रणीनीति और प्रबंधन ने ही काम किया था।
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माधव ने अपनी वसीयत में कहा है कि संभव हो तो मेरा अंतिम संस्कार होशंगाबाद जिले के बांद्राभान में नदी महोत्सव वाले स्थान पर किया जाए। साथ ही उत्तर क्रिया वैदिक कर्म के साथ ही हो, किसी भी प्रकार का दिखावा आयोजित न हों।
 
उन्होंने अपनी वसीयत में मांग रखी कि मेरी स्मृति में कोई भी स्मारक, प्रतियोगिता, पुरस्कार, प्रतिभा आदि जैसे विषय कोई भी न चलाए। मेरे लिए पेड़ लगाए और उन्हें बचाने के लिए बड़ा कार्य किया जाए, जिसेस मुझे आनंद होगा। 
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राज्य में कांग्रेस की सरकार के समय दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। 2003 के विधान सभा चुनावों दवे ने ही दिग्विजय सिंह के लिए मिस्टर बंटाधार जुमला प्रयोग किया था। यह जुमला पूरे देश में प्रसिद्ध हो गया था। अनिल माधव दवे ने मध्यप्रदेश में नर्मद नदी के उत्थान के लिए लगातार काम किया था। उन्होंने ‘नर्मदा समग्र’ मिशन शुरू किया था। नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत भी दवे ने ही की थी।

पर्यावरण और ग्लोबल वॉर्मिंग में उनकी रुचि थी। यही नहीं, उन्होंने भोपाल में अपने घर को नर्मदा नदी का संग्रहालय बना दिया है जिसका नाम नदी का घर है। मध्यप्रदेश के उज्जैन में आयोजित किया गया विश्व हिन्दी सम्मेलन उनकी वजह से ही आयोजित हो सका। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की महत्वकांक्षी नदी जोड़ो परियोजना के पीछे दवे का ही दिमाग था।

6 जुलाई 1956 को उनका जन्म मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर गांव में हुआ था। माधव ने इंदौर के गुजराती कॉलेज से एम कॉम किया था। शादी न करने वाले माधव ने देश की सेवा का फैसला लिया, जिसकी वजह से उन्हें एक सोशल एक्टीविस्ट भी कहा जाता है। वे संघ प्रचारक रहे और 2009 से राज्यसभा मेंबर रहे। 5 जुलाई को जब वे फिर से राज्यसभा के मेंबर चुने उन्हें पर्यावरण मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंप दिया गया।
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नर्मदा नदी को लेकर उठाए गए कदमों के लिए पहचाने गए

दरअसल, माधव दवे की ये खासियत रही है कि वे पर्यावरणविद थे। उन्हें नर्मदा नदी को लेकर उठाए गए कदमों के लिए खूब पहचाना जाता है। दरअसल, उन्होंने नर्मदा समग्र नाम से एक संगठन शुरू किया और नदी के बचाव के लिए मुहिम शुरू कर दी। इस संगठन की ओर से उन्होंने नदी त्यौहार भी शुरू किया गया, जिसकी तारीफ भारत ही नहीं पूरे एशिया में की गई।

उन्हें पर्यावरण से इस कदर लगाव था कि भोपाल में अपने घर का नाम भी 'नदी का घर' रख दिया। इतना ही नहीं इसे घर को एक संग्राहलय की तरह बना दिया गया, जोकि लोगों के लिए खोल दिया गया था।     माधव एक प्रतिष्ठित लेखक भी माने जात हैं। उन्होंने राजनीति, प्रशासनिक, कला-संस्कृति, इतिहास और पर्यावरण पर कई किताबे लिखी हैं। हिंदी के प्रेमी माने जाने वाले माधव ने अपने मंत्रालय में हर काम हिंदी में किए जाने पर ही जोर दिया हुआ था।
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