टीम इंडिया से बाहर चल रहे ऑफ स्पिनर और मुंबई इंडियंस के स्टार क्रिकेटर हरभजन सिंह ने घरेलू क्रिकेटरों की आर्थिक तंगी को लेकर भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच अनिल कुंबले को पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए भज्जी ने कुंबले से अपील की है घरेलू क्रिकेटरों को मिल रहे पैसे में बढ़तरी की जाए। भज्जी ने इस पत्र में लिखा है कि घरेलू क्रिकेट खिलाड़ियों के बहुत कम पैसा मिलता है। ऐसे में दुनिया के सबसे धनी बोर्ड को उनकी आर्थिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
पीटीआई से बातचीत में हरभजन ने कहा, "मैं काफी समय से घरेलू क्रिकेट खेल रहा हूँ। मेरा मानना है कि इस खिलाड़ियों को काफी कम पैसा दिया जा रहा है। मैं अपने लिए पैसा नहीं मांग रहा हूँ। मेरी अपील है कि डोमेस्टिक सर्किट में खेलने वाले प्लेयर्स को कम पैसा मिल रहा है और इसे बढ़ाए जाने की जरूरत है।"
बता दें की रणजी प्लेयर्स को हर मैच के 1.5 लाख रुपये मिलते हैं। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे विदेशी क्रिकेटरों की बात की जाए, तो यह रकम काफी कम है क्योंकि वहां घरेलू क्रिकेटर करीब 50 लाख रुपये तक सालाना कमा लेते हैं।
1 टेस्ट फीस = 10 रणजी मैच
हरभजन सिंह
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भज्जी ने कहा कि 2004 के बाद से ही खिलाड़ियों को मिलने वाले पैसे के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया। यह तब से जस का तस बना हुआ है। 2004 में जो 100 रुपये की कीमत थी, क्या आज भी उसका वही मूल्य है? ऐसे में खेलना खिलाड़ियों के लिए मजबूरी बना हुआ है। साथ हरभजन ने कहा कि हर खिलाड़ी को न तो टीम इंडिया में जगह मिलती है और न ही सब आईपीएल में नीलाम हो पाते हैं। ऐसे में उनपर अपने परिवार की भी काफी जिम्मेदारियां होती हैं। इसलिए उन्हें उचित मेहनताना मिलना जरूरी है।
इस इंटरव्यू में भज्जी ने कहा, "भारतीय बोर्ड ने टीम इंडिया के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए ग्रुप तय किए हुए हैं, जिसके अनुसार उन्हें पैसा मिलता है। ग्रुप ए को 2 करोड़ रुपये, ग्रुप बी में 1.5 करोड़ रुपये और ग्रुप सी में 1 करोड़ रुपये प्रति वर्ष मिलते हैं। इसके बदले एक रणजी मैच खेलने वाले प्लेयर को सिर्फ 1.5 लाख रुपये ही मिलते हैं, जो बेहद कम है।"
गौरतलब है कि बीसीसीआई के अनुसार, टीम इंडिया के लिए एक टेस्ट खेलने वाले प्लेयर को 15 लाख रुपये में मिलते हैं। इसके अलावा इन खिलाड़ियों को हर वनडे के 6 लाख रुपये और टी-20 के 3 लाख रुपये भी दिए जाते हैं।