कश्मीर को लेकर पाकिस्तान आए दिन दुष्प्रचार करता रहता है और हमारे देश पर अनर्गल आरोप लगाता रहा है। इतना नहीं पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय सेना का नाम भी घसीटा जाता है। जबकि सच्चाई क्या है, अब यह पूरी दुनिया जान चुकी है। जब भारतीय सेना पर पत्थरों से हमला किया जाता है तो वो क्यों चुपचाप खड़ी रहती है? जब वहां के घरों में छिपकर आतंकी उनपर हमला करते हैं तो वो क्यों सेना उन घरों पर हमला नहीं करती और खुद गोली खाती है?
लेकिन कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन में निर्वासित जीवन बिता रहे बलोच लोगों से पूछिए तो पाकिस्तान के चेहरे से नकाब उतरता हुआ दिखता है। वहां पाक सेना ने मानवाधिकार हनन में कोई कसर नहीं छोड़ी है। हजारों की संख्या में बलोच लोगों को अगवा करके कत्ल किया जा चुका है। तो जानते हैं पाकिस्तान के पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान के बारे में।
पाक अधिकृत कश्मीर को दो हिस्सों में बांटा गया है, पहला हिस्सा है आजाद जम्मू-ओ-कश्मीर और दूसरा हिस्सा गिलगित-बल्तिस्तान। गिलगित-बल्तिस्तान रहित आजाद कश्मीर का इलाका 13,300 वर्ग किलोमीटर (5,135 वर्ग मील) पर फैला है और इसकी आबादी अंदाजन 40 लाख है। आजाद कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद है और इसमें 8 जिले, 19 तहसीलें और 182 संघीय काउन्सिलें हैं।
पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में सैंकड़ों लोगों को मौत के घाट उतारा है। हजारों लोग यहां से लापता भी हुए हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सेना की फर्जी मुठभेड़ में लगातार मौत और लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की जांच में ये पता चला था कि 5 हजार लोग लापता हैं। कोर्ट में ये मामला अभी भी जारी है। बता दें इसी मामले में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व फौजी शासक परवेज मुशर्रफ की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए थे।
मानवाधिकार संगठनों द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार 2003-2012 के बीच पाकिस्तानी सेना ने 8 हजार लोगों को अगवा किया है। साल 2008 में ही करीब 1100 बलूच लापता बताए जाते हैं। यहां सड़कों पर अकसर ऐसे शव पाए जाते हैं, जिनपर काफी अत्याचार हुआ होता है।
यहां एक दूसरा टकराव 2010 में हिंदुओं, शिया समुदाय और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के साथ शुरू हुआ। पाकिस्तानी तालिबान और कट्टर सुन्नी गुटों- लश्कर-ए-जांघी और जमायत-ए-इस्लामी ने उनपर अत्याचार किया। अनुमान के अनुसार हाल ही के सालों में 600 से ज्यादा लोगों की जानें गई हैं और करीब 3 लाख लोगों के विस्थापित होने की आशंका है।
बलूच उग्रवादियों ने पाकिस्तान के कई हिस्सों से आकर बसे लोगों पर हमले किए हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2006 के बाद से करीब 800 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इसका मतलब ये है कि पाकिस्तान सरकार ने अपनी परियोजनाओं के लिए बाहर के लोगों को लाकर बसाने की नीति शुरू कर दी है। इसके पीछे तर्क दिए जाते हैं बलूच लोगों में साक्षरता की कमी है और यहां हुनरमंद लोग भी नहीं हैं।
इसपर बलूच लोग कहते हैं कि पाकिस्तान सरकार ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि वह चाहती है कि बलूच लोगों को अल्पसंख्यक बना दिया जाए। साथ ही वह यहां के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन भी करना चाहती है।
बलूचिस्तान के तटीय इलाके ग्वादर में बंदरगाह निर्माण भी टकराव की वजह बन रहा है। चीन अपने दक्षिणी प्रांतों से पाकिस्तान में आर्थिक कॉरिडोर का एक अहम पड़ाव बनाना चाहता है। इसका निर्माण साल 2002 में शुरू हुआ था। इसपर पाकिस्तान की संघीय सरकार पूरा नियंत्रण कर रही है। वहीं निर्माण के इस काम में चीनी मजदूर और इंजीनियर लगे हुए हैं। बलूच लोगों की धरती हो रहे इस निर्माण कार्य से उन्हें बिल्कुल दूर रखा गया है।
केवल इतना ही नहीं कथित तौर पर बलूच लोगों से उनकी जमीनें लेकर सरकारी अधिकारियों ने भारी कीमत पर बेच दी हैं। इससे वहां के लोग बेहद नाराज हैं। जब भी ये लोग इस बात का विरोध करते हैं तो उनपर सौनिक कार्यवाही शुरू कर दी जाती है। यही कारण था कि बलूच अलगाववादियों ने साल 2004 में तीन चीनी इंजीनियरों को मार दिया था।